विकास के साथ जीव-जंतु और पौधों का संरक्षण भी हो

विकेंद्रीकत नियोजन प्रणाली पर एक दिनी प्रशिक्षण...

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Sep 14, 2016
chhindwara
छिंदवाड़ा. गांव के समाज और समावेशी विकास के लिए यह जरूरी है कि हम इसके साथ जैव विविधता का भी संरक्षण करें। ग्राम के विकास की योजना के साथ जीव जंतुओं और विलुप्त हो रहे पेड़ पौधों के संरक्षण की बात भी करे। इसके लिए सब को मिलकर यह काम करना होगा। बिछुआ के जनपद पंचायत भवन में समाज और समावेशी विकास विषय पर एक दिनी प्रशिक्षण में इस मुद्दे पर विशेष चर्चा की गई।

प्रशिक्षण में दक्षिण वनमंडल के डीएफओ रविंद्र मणि त्रिपाठी, एलके इंगले, बकरलीप परियोजना की प्रोजेक्ट आफीसर सुप्रिया कोचर, टेक्नीकल मेनेजर प्रदीप और मास्टर ट्रेनर श्यामलराव उपस्थित थे। सुप्रिया कोचर ने बताया कि बकरलीप योजना मेें ग्राम स्तरीय विकेंद्रीयकृत योजना तैयार की जाएगी।

इसके लिए मोहखेड़, बिछुआ और सौंसर के 15 ग्रामों के लोगों को शामिल किया जाएगा। इसमें सब इंजीनियर, पशु विभाग, वन विभाग, ग्राम सचिव, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, जनशिक्षकों के साथ बकरलप के शोसल मोबेलाईजर शामिल किए जाएंगे।

बीएसडब्लू के विद्यार्थियों को भी रखा जाएगा । प्रशिक्षण के बाद ये चिन्हित गांवों में पांच दिनी भ्रमण कर ग्राम की कार्ययोजना तैयार करेंगे। डीएफओ त्रिपाठी ने कहा कि तकनीकि दलो में वन विभाग की भूमिका के साथ -साथ अन्य विभागो की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

ग्राम की योजना तैयार करते समय विभाग द्वारा संचालित कार्यो एवं गतिविधियो को ध्यान में रखते हुए योजना में शामिल करेगे। उन्होंने जैव विविधता के संरक्षण के विभिन्न पहलुओ को भी शामिल कर प्रकृति में लुप्त हो रहे जीव जन्तु , पेड पौधे व बीजो का संरक्षण कैसे किया जाये पर विस्तृत जानकारी दी ।

श्यामलराव ने तकनीकि दलो के कार्य एवं दी जाने वाली जवाबदारियों परबात कही। ग्राम पंचायत नियोजन , समिति का गठन , योजना निर्माण के अन्तर्गत ग्रामीण सहभागिता का आंकलन आदि परतकनीकी जानकारी उन्होंने दी। प्रशिक्षण में ग्राम योजना तैयार करने का अभ्यास भी प्रशिक्षणार्थियों को चार समूहों में बांटकर कराया गया। संचालकन एलके इंगले ने किया।
Published on:
14 Sept 2016 05:09 pm
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