
छिंदवाड़ा. रेलवे क्रॉसिंग पर फाटक लोगों की सुरक्षा के लिए लगाए जाते हैं। इन फाटकों को ट्रेन निकलते समय बंद किया जाता है। ट्रेन गुजरते ही खोल कर दिया जाता है। फाटक बंद होने के बावजूद निकलना बेहद खतरनाक हो सकता है। आने वाली ट्रेन के पहिए मौत का कारण बन सकते हैं। शहर में रेल फाटकों के बंद होने पर भी पैदल और दोपाहिया वाहन चालक निकलने का प्रयास करते हैं और कई निकल भी जाते हैं। पत्रिका ने बीती रात नौ बजे के बाद चार फाटक रेलवे के बंद होने के बाद जो देखा वह यकीनन ही लोगों की नासमझी का जीता जागता नमूना था। चार फाटक बंद होने के बाद कुछ पैदल एवं कई वाहन निकले। यहां तक कि ट्रेन के मात्र कुछ मीटर की दूरी भी उन्हें खतरे का एहसास न दिला सकी। भले ही ट्रेन की रफ्तार कम थी, लेकिन लोगों का निकलना जारी था।
गेटमैन की आवाज भी करते हैं अनसुनी
लोगों को आती ट्रेन के सामने से गुजरते देख चारफाटक के गेटमैन दौड़कर पास पहुंचकर आवाज लगाई। उन्हें वहां से भगाने क ा प्रयास किया, लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। गेटमैन दो-तीन वाहनों के पीछे भागा, नम्बर भी लिखना चाहा पर बिना नम्बर के वाहन तेज गति से निकल गए। कुछ देर के लिए चार फाटक पर ट्रेन खड़ी भी रही। इस दौरान लोग दस फीट की दूरी को भी नजरअंदाज करके निकलते रहे। गेटमैन ने बताया कि वाहनों को रोकना उसके लिए भी कई बार भारी पड़ जाता है। फिर भी उसकी कोसिस रहती है कि लोग बंद गेट से न निकलें।
आठ फाटकों के लिए 16 जवानों की है जरूरत
शहर के अंदर केवलारी से लेकर स्टेशन तक करीब आठ रेलवे फाटक हैं जिनमें एक-एक जवान की भी ड्यूटी लगाई गई तो दो शिफ्ट के लिए कम से कम 16 जवान की जरूरत पड़ेगी। आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि पहले से ही स्टाफ की कमी है इसलिए परमानेंट जवान तैनात नहीं कर पाते हैं। हालांकि आकस्मिक निरीक्षण किया जाता है।
रेल अधिनियम की धारा १५९ का उल्लंघन
गेटमैन के रोकने के बाद भी बंद फाटक से निकलना रेल अधिनियम की धारा 159 का उल्लंघन है। इस अधिनियम के तहत पकड़े जाने पर पेशी जबलपुर न्यायालय में होगी। इसमें 500 से 1000 रुपए जुर्माना या २ से 5 माह की सजा अथवा दोनों ही हो सकते हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान एेसे करीब दर्जनभर मामले बनाए जा चुके हैं।
मनीष यादव, आरपीएफ इंस्पेक्टर