पैसेंजर ट्रेन को छिंदवाड़ा रवाना किया गया।
छिंदवाड़ा. जिले में भारी बारिश के चलते मंगलवार शाम को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नागपुर मंडल के अंतर्गत भिमालगोंदी से भंडारकुंड रेल सेक्शन में रेलवे ट्रैक के नीचे से मिट्टी एवं गिट्टी बह गई। वहीं तेज हवाओं के चलते ट्रैक पर पेड़ की टहनियां भी गिर गई। इससे रेल यातायात प्रभावित हुआ। तत्काल ही रेलवे के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सजगता दिखाई और इतवारी से छिंदवाड़ा आ रही ट्रेन को रामाकोना रेलवे स्टेशन में रोक दिया गया। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे रेलवे कर्मचारियों ने रेलवे ट्रैक में सुधार किया। इसके पश्चात रात लगभग 9 बजे पैसेंजर ट्रेन को छिंदवाड़ा रवाना किया गया। लगभग तीन घंटे ट्रेन रामाकोना स्टेशन पर खड़ी रही। हालांकि ट्रेन भिमालगोंदी रेलवे स्टेशन पर भी खड़ी की जा सकती थी, लेकिन इस स्टेशन से उतरने के बाद यात्रियों को बस या फिर अन्य कोई साधन नहीं मिलता। गौरतलब है कि पैसेंजर ट्रेन प्रतिदिन इतवारी से दोपहर 3.30 बजे रवाना की जाती है और इस ट्रेन के छिंदवाड़ा पहुंचने का समय शाम 7.50 बजे है। मंगलवार को ट्रेन रामाकोना रेलवे स्टेशन में निर्धारित समय शाम 6.18 बजे पहुंची। इसके बाद रेलवे ट्रैक के खराबी की वजह से ट्रेन को रामाकोना स्टेशन पर लगभग तीन घंटे रोककर रखा गया। जिससे ट्रेन से छिंदवाड़ा आने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
दादा धाम एक्सप्रेस को दोबारा चलाने की मांग दरकिनार
रेलवे बोर्ड दादाधाम इंटरसिटी एक्सप्रेस को कम यात्री संख्या की वजह से नहीं चला रहा है। यह बातें बीते दिनों मध्य रेल मुंबई के महाप्रबंधक ने जोनल रेलवे उपभोक्ता व सलाहकार समिति के साथ हुई परामर्श बैठक में कही। समिति सदस्य सतीश यादव ने यात्रियों के हित में एक्सप्रेस को दोबारा शुरू करने की मांग की थी। बता दें कि कारोना की वजह से मार्च 2020 में इस ट्रेन को बंद कर दिया गया था। अब सबकुछ सामान्य होने एवं अधिकतर जगह पर ट्रेनों की सुविधा फिर से शुरु होने पर दादाधाम इंटरसिटी एक्सप्रेस को फिर से चलाने की मांग की जा रही है। मध्य रेल नागपुर मंडल के तहत नागपुर के अलावा पांढुर्ना, मुलताई, बैतूल, आमला, घोड़ाडोंगरी आदि स्टेशनों से सफर करने वाले यात्रियों ने दादाधाम इंटरसिटी ट्रेन के परिचालन को लेकर रेल अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा था। जिले के कई क्षेत्रों के लोगों के लिए यह ट्रेन काफी सहायक थी। परामर्श बैठक में जो जानकारी ट्रेन के परिचालन न करने को लेकर दी गई है वह स्थानीय लोगों के समझ से परे है। इसकी वजह यह है कि कोरोना काल से पहले सप्ताह में 3 दिन चलने वाली दादाधाम इंटरसिटी एक्सप्रेस में काफी भीड़ होती थी। इसके बावजूद भी रेलवे इस ट्रेन में कम यात्री होने का हवाला दे रही है।
ट्रेन शुरु करने को लेकर प्रक्रिया बदली
रेलवे से जुड़े जानकारों का कहना है कि ट्रेनों को चलाने का निर्णय बोर्ड स्तर पर ही लिया जाता है। हालांकि कोरोना काल के बाद बोर्ड ने काम का नया तरीका अपनाया है। अब बंद ट्रेनों को दोबारा शुरू करने के लिए मंडल रेल प्रबंधक और जोन स्तर की अनुशंसा अनिवार्य कर दी है। कोविड काल के बाद लगभग हर ट्रेन को इसी प्रकार शुरू किया गया।