Shaheed kabir das: जम्मू कश्मीर के कठुआ में आतंकी मुठभेड़ में शहीद हुए थे सीआरपीएफ जवान कबीर दास, छिंदवाड़ा जिले के पैतृक गांव पुलपुलडोह में पसरा मातम..
Shaheed kabir das: जब तक सूरज चांद रहेगा शहीद कबीर दास का नाम रहेगा, शहीद कबीर दास अमर रहे..इन्हीं गूंजों के साथ शहीद कबीर दास का छिंदवाड़ा जिले के पुलपुलडोह गांव में अंतिम संस्कार किया गया। आदिवासी समाज के रीति रिवाजों के तहत राजकीय सम्मान के बाद शहीद कबीरदास की पार्थिव देह को गांव में स्थित उनके मकान के पीछे के खेत में दफनाया गया है जहां उनका स्मारक बनाया जाएगा। शहीद कबीर दास को अंतिम विदाई देने के लिए छिंदवाड़ा के सांसद विवेक बंटी साहू और मध्यप्रदेश सरकार की मंत्री संपतिया उइके भी पहुंची।
शहीद कबीर दास की पार्थिव देह जैसे ही तिरंगे में लिपटी उनके पैतृक गांव पुलपुलडोह पहुंची तो हर किसी आंखें नम हो गईं। परिजन पार्थिव देह देख बिलख पड़े। जैसे ही बेटे का शव घर पहुंचा मां की चीखें लगना शुरु हो गईं। बिलखते हुए बोली मां- 'जल्दी घर आने का किया वादा, पता नहीं था शहीद होकर आएगा'। पत्नी बेसुध हालत में घर के एक कौने में बैठी है। यही नहीं पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। जबकि पूरे गांव में मातम सा पसरा हुआ है। जिस किसी ने भी ये मंजर देखा वो भावुक हुए बिना नहीं रह सका। अंतिम दर्शनों के बाद तिरंगे में लिपटी शहीद कबीर दास को सीआरपीएफ जवानों ने गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया।
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आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखने वाले शहीद कबीर दास का अंतिम संस्कार आदिवासी रीति रिवाजों से ही किया गया। शहीद कबीर दास को सांसद विवेक बंटी साहू ने नम आंखों से कांधा दिया और फिर गांव में स्थित मकान के पीछे के खेत में उनकी पार्थिव देह को दफना दिया गया। जिस जगह पर शहीद कबीर दास को दफनाया गया है वहां उनका स्मारक बनाया जाएगा। बता दें कि कबीर दास जम्मू कश्मीर के कठुआ इलाके में हुई आतंकी मुठभेड़ के दौरान गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था।
शहीद कबीर दास की मां इंद्रावती ने रोते बिलखते हुए बताया कि घटना से पहले बेटे ने उनसे करीब 2 बजे फोन पर बात की थी। उस समय उसने वादा किया था कि 'मां मैं जल्दी ही घर आउंगा,तू चिंता न कर।' उन्होंने आगे कहा कि 'बेटे ने अपना वादा पूरा किया वो जल्दी तो आ गया, लेकिन पता नहीं थी कि शहीद होकर घर आएगा।