श्रीमद् भागवत महापुराण
छिंदवाड़ा. लेबर कोर्ट गली गुलाबरा में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा के छटवें दिन पंडित जितेंद्र महाराज ने कथा में नंदोत्सव का वर्णन किया। महाराज श्री ने पूतना वध की कथा कहते हुए कहा कि मेरे प्रभु का स्वभाव ऐसा है कि जिस पूतना का ना कुल अच्छा न नाम अच्छा ना काम अच्छा ना आहार अच्छा ऐसी पूतना भी भगवान को जहर पिलाने जब आाई तो प्रभु ने उसे पहले ही वो गति दी माता यशोदा को बाद में मिली। इसलिए कि जैसा भी हो वह बन कर तो मां के रूप में आई और अपने सीने से लगाया। ऐसे करुणा के सागर प्रभु जब पूतना में दोष नहीं देख सकते वो अपने भक्तों में कहां दोष देखेंगे।
बुधवार की कथा में पंडितजी ने तृणावर्त वध और नामकरण संस्कार की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि नंदबाबा के यहां उस समय सबसे ज्यादा गाएं थी और नित्य नया माखन होता था क्या वह कृष्ण गोपियों के घर माखन चोरी करेगा। भगवान ने गोपियों के मन रूपी माखन की चोरी की है।
परीक्षित बनकर कथा सुनें और पाएं मोक्ष
श्राप से मुक्ति पाने और मोक्ष प्राप्त करने के लिए राजा परीक्षित ने एक सप्ताह तक माया मोह को छोडक़र भागवत की कथा शुकदेवजी महाराज से सुनी। इस प्रसंग का तात्पर्य यही है कि मनुष्य राग, द्वेष,अहंकार, लोभ, मोह को छोडक़र निर्मल मन वचन और कर्म से एक सप्ताह तक ही भगवान की कथा का स्मरण कर लें तो वह मोक्ष को प्राप्त करने का अधिकारी बन सकता है। आप भी परीक्षित बनकर कथा को सुनें और मनुष्य रूपी इस जन्म को धन्य करें। यह बात पं रामविशाल शुक्ल महाराज ने श्रद्धानगर में भागवतकथा के आखिरी दिन कही। बुधवार को सुदामा प्रसंग और परीक्षित मोक्ष की कथा के साथ कथा संपन्न की। आखिरी दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने को उमड़े। उन्होंने सुदामा प्रसंग की कथा भी बड़े सुंदर तरीके से सुनाई। संगीतमय कथा में विपन्न विप्र सुदामा का आखिर अपने बाल सखा और प्रभु भगवान श्रीकृष्ण से मिलन होता है और इसके बाद तो उसके दिन फिर जाते हैं। २० दिसम्बर से शुरू हुई कथा का समापन देर शाम को हुआ। गुरुवार को हवन पूजनन के बाद महाप्रसाद का वितरण होगा। आयोजन में पं वीरेंद्र शुक्ल और पं शैलेंद्र शुक्ल ने पुराण वक्ता के रूप में सहयोग दिया।