हालत यह है कि हर दिन 5 से 10 व्यक्ति डॉग बाइट से पीडि़त होकर जिला अस्पताल आ रहे हैं। नगर निगम पूरी तक तरह डॉग बाइट पर लगाम नहीं लगा पाया है।
नगर निगम ने 3.75 करोड़ रुपए का टेंडर कर आवारा कुत्तों की नसबंदी का कार्य गुजरात की एजेंसी को सौंप दिया है। उसके बाद आवारा कुत्तों के काटने से शहरवासियों को राहत नहीं मिल पा रही है। हालत यह है कि हर दिन 5 से 10 व्यक्ति डॉग बाइट से पीडि़त होकर जिला अस्पताल आ रहे हैं। नगर निगम पूरी तक तरह डॉग बाइट पर लगाम नहीं लगा पाया है।
नगर निगम की मानें तो पिछले साल 2024-25 में नगर निगम में आवारा कुत्तों की आबादी को कंट्रोल करने नसबंदी कार्यक्रम शुरू किया गया था। करीब 3.75 करोड़ रुपए का टेंडर कर कार्यादेश गुजरात की यस डोमेस्टिक एंड रिसर्च सेंटर फर्म को दिया गया। इसके बाद एजेंसी अब तक 4042 आवारा कुत्तों की नसबंदी का दावा कर चुकी है। नगर निगम की ओर से उसे 14 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया है। इसके बाद भी देखने में आ रहा है कि लगातार नसबंदी होने पर भी आवारा कुत्तों की आक्रामकता कम नहीं हुई है। वे लगातार आम नागरिक, बच्चे और महिलाओं को निशाना बना रहे हैं।
नगर निगम की जानकारी के अनुसार सामान्य एक आवारा कुत्ते की नसबंदी पर 1400 रुपए खर्च का करने का नियम है लेकिन नगर निगम की ओर से पोआमा शेल्टर हाउस में हो रही नसबंदी में 1100 रुपए खर्च हो रहे है।
नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों की नसबंदी का लगातार अभियान चलाने के बावजूद जिला अस्पताल मेंं हर दिन 5 से 10 केस अकेले डॉग बाइट के दर्ज हो रहे हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि निगम की एजेंसी मैदान में काम कर रही है या नहीं। ये लोग मैदान में काम करते दिख नहीं रहे हैं। आवारा कुत्तों की आक्रामकता बरकरार है।
नगर निगम में आवारा कुत्तों की नसबंदी पर रोक लगाने गुजरात की एजेंसी काम कर रही है। उसे अब तक 4042 नसबंदी ऑपरेशन पर 14 लाख रुपए का भुगतान किया गया है। विगत छह माह से भुगतान रुका हुआ है। आवारा कुत्तों के काटने के मामले में एजेंसी के कार्यो की समीक्षा की जाएगी।
-अरूण गढ़ेवाल, स्वच्छता निरीक्षक, नगर निगम।