स्वीकृति से भी आधा बल होने के कारण जांच व सुरक्षा व्यवस्था में होती है समस्या, अधिकारी व कर्मचारियों पर पड़ता है अतिरिक्त भार
छिंदवाड़ा. शहर के तीनों थाने कोतवाली, देहात तथा कुंडीपुरा वर्तमान में बल की कमी से जूझ रहे है। जिला मुख्यालय की सीमा में इन थानों का कार्य क्षेत्र आता है ऐसे में इन क्षेत्रों में बढ़ता अपराध का ग्राफ वर्तमान समय में चिंता का विषय बना हुआ है। स्वीकृति से कम बल व कई दशक पुरानी स्वीकृति व बढ़ता शहर का दायरा दोनों के मुकाबले बल कम होने से पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही अपराधों की जांच में समस्या सामने आती है। यह कहना गलत नहीं होगा कि बल की कमी के कारण वर्तमान में पदस्थ बल पर कार्य का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
बल की कमी के कारण त्योहार व राजनैतिक कार्यक्रमों में शहर के तीनों थानों का पूरा बल सडक़ पर उतर जाता है ऐसे में पुलिस के अन्य कार्य व जांच कई दिनों तक प्रभावित होती है। बल की इतनी कमी है कि थानों में लिखा पढ़ी का कार्य करने वाले तक कर्मचारी सडक़ों पर नजर आते है। हालांकि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी जिले भर के थानों व पुलिस लाइन से अतिरिक्त बल भी इन राजनैतिक कार्यक्रमों में लगा देते है।
थानों में महिला अधिकारियों व कर्मचारियों की कमी के कारण महिला संबंधित अपराधों के लिए गठित महिला उर्जा डेस्क में भी महिला अधिकारी मौजूद नहीं हो पाती है। थानों में एक महिला अधिकारी के होने से यह समस्या आती है कि अवकाश पर जाने के कारण कई दिनों तक उर्जा डेस्क का कार्य भी प्रभावित होता है। इसके साथ ही महिला संबंधित अपराध होने पर थाना प्रभारियों को अन्य थाने में पदस्थ महिला अधिकारी को तत्काल बुलाना पड़ता है।
कहने के लिए पुलिस कर्मियों को एक दिन का अवकाश दिया जाना है जो पूर्व में शुरू किया गया लेकिन बाद में बल की कमी के कारण बंद कर दिया गया है। प्रदेश में कई जिलों में एक दिन का अवकाश पुलिस कर्मियों को मिल रहा है लेकिन जिले में पुलिस कर्मियों के लिए एक दिन का अवकाश सपना सा लग रहा है। बल की कमी के कारण वर्तमान में माइक्रो बीट सिस्टम भी पूर्णत: काम नहीं कर पा रहा है, रात की गश्त में भी एक पुलिस कर्मी के भरोसे काफी लंबा क्षेत्र है ऐसे में सभी स्थानों पर रात्रि गश्त संभव नहीं है।
शहर के तीनों थानों कोतवाली, देहात तथा कुंडीपुरा में पिछले कुछ समय में लूट की वारदात सामने आई है जिसकी जांच की जा रही है लेकिन पुलिस के हाथ अभी भी खाली है जिसका सबसे बड़ा कारण बल की कमी होना भी है। अपराधियों को पकडऩे टीम बार-बार जिले से बाहर नहीं जा सकती है जिसके कारण इन मामलों का खुलासा नहीं हो पाया है। देहात में सराफा व्यापारी के साथ लूट के मामले में सोना बरामद नहीं हो पाया है। कोतवाली थाना क्षेत्र में चंदनगांव में महिला से मंगलसूत्र लूट तथा सत्कार चौक पर बाइक की डिक्की से एक लाख रुपए चोरी के मामले अनसुलझे है। कुंडीपुरा थाना क्षेत्र में मोबाइल सेल्समेन से दो लाख की लूट भी अभी अनसुलझी है। इसके साथ ही कई ऐसे अपराध है जिनकी जांच अधूरी है।
थाना स्वीकृत पदस्थ
कोतवाली 85 52
कुंडीपुरा 43 34
देहात 56 38
शहर के तीनों थानों में वर्तमान में एसआई व आरक्षक के ज्यादा पद खाली है जो सबसे ज्यादा कार्य करते है। एसआई स्तर का अधिकारी गंभीर अपराधों की जांच करता है वहीं आरक्षक जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहते है। तीनों थानों में एसआई व आरक्षक के पद रिक्त है जिनकी समय-समय पर मांग की जाती है।
जिले में बल की कमी काफी लंबे समय से बनी हुई है, जिसको लेकर विभाग को समय-समय पर अवगत कराया जाता है। आने वाले समय में जिले को बल मिलेगा तो काफी हद तक व्यवस्थाएं और बेहतर हो जाएगी।