
चित्रकूट. आइए सीएम साहब सुनिए मेरे सूखे हलक की दर्द भरी आवाज, मैं पाठा हूं। मुझे सिर्फ दो समस्याओं के लिए पहचाना जाता है पहली दस्यु समस्या और दूसरी वो जिसे खूब भुनाया है सियासत के लम्बरदारों ने वो है मेरे प्यासे कण्ठ की बेताबी पानी के लिए। आपने भी खूब वादे किए हैं मेरे हलक को तर करने के लिए पहले के हुक्मरानों की तरह लेकिन हाल फि़लहाल जो तस्वीरें मैं पिछले कई दशकों से देखता चला आ रहा हूँ उससे तो यही लगता है कि मेरा दर्द शायद सियासत के लिए अब एक मुद्दा और मजाक भर बनकर रह गया है।
खूब लूटा है मुझे इस नौकरशाही ने पानी पिलाने के नाम पर. मेरे सीने पर योजनाओं के नाम पर न जाने कितने घाव (तालाब व कुंए) किए गए हैं लेकिन उन घावों में लहू (पानी) न निकला क्योंकि जख्मों की गहराई में भी घोटालेबाजों ने खेल कर दिया। आइए मुख्यमन्त्री जी देखिए कि किस तरह भोर की पौ फटते ही मेरे बाशिंदों की जद्दोजहद शुरू हो जाती है पानी के लिए, मेरी गोद में अठखेलियां करते न जाने कितने बेजुबान सूरज की तपती भौहों के बीच सूखे कण्ठ की वजह से मौत की आगोश में सो जाते हैं। आइए मुख्यमन्त्री जी देखिए मुझे मैं हूँ पाठा। जी हां शायद कुछ ऐसी ही कराह निकल रही है सूखे हलक के साथ पाठा की।
सूखती भाइलें हरी-भरी की जा रही हैं
यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के 11 अप्रैल के संभावित दौरे के मद्देनजऱ प्रशासनिक घरौंदों में भूकम्प के झटके आने शुरू हो गए हैं। बुन्देलखण्ड की नासूर बन चुकी पेयजल समस्या की सूखती फाइलें अचानक से हरी भरी की जा रही हैं कि सीएम साहब को तालाबों, पोखरों, हैण्डपम्पों के आंकड़ों के मायाजाल में उलझाकर उन्हें मिनरल वाटर पिलाते हुए विदा कर दिया जाएगा और अगर सूखे कण्ठ वाले माननीय से मिलने की कोशिश करें तो उन्हें सुरक्षा का हवाला देकर टरका दिया जाएगा। कुछ ऐसा ही फुलप्रुफ प्लान तैयार कर रहे हैं साहब लोग।
तस्वीरें बयां कर रही हकीक़त
व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते सूखे हलक के साथ खड़े हैण्डपम्प, घोटालों की गहराई बयां करते सूखे कुंए और भ्रष्टाचार की लम्बाई चौड़ाई व गहराई का बखान करते सूखे तालाब, ये पाठा की वो तस्वीरें हैं जो पेयजल संकट से निपटने के लिए किए गए अब तक के उपायों की स्याह सच्चाई बयां करती हैं। पाठा के मानिकपुर विकासखण्ड अंतर्गत पहाड़ों के आस पास स्थित गांवों में जल देवता की बेरुखी निर्दयता पर उतारू है। हर साल गर्मी के तल्ख तेवरों के साथ इन इलाकों में भीषण पेयजल संकट उत्पन्न होता आया है। बीहड़ में बसे अमचुर नेरुआ, घाटा कोलान आदि आदिवासी इलाकों में पेयजल संकट विकराल रूप की ओर अग्रसर है। इसी तरह पाठा के रामपुर कल्यानगढ़, शेषापुर, मऊ गुरदरी कोटा कदेंला आदि इलाकों में भी ऐसे ही हालात हैं।
बैलगाड़ी से ढोया जा रहा पानी
पाठा की ये तस्वीर बाहरी दुनिया के लिए नई और मनोरंजक हो सकती है लेकिन पिछले कई दशकों से खुद पाठा की मजबूरी बन गई हैं। ऐसी तस्वीरें जिन्हें हर साल गर्मी में देखने के लिए विवश होना पड़ता है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में दूर दूर से बैलगाडिय़ों से पानी ढोया जा रहा है। हजारों हैण्डपम्पों कुंओं तालाबों के होने के बावजूद भी यदि पाठा की आज भी यही तस्वीर है तो उसकी जितनी जि़म्मेदार प्रकृति है उससे कहीं ज्यादा व्यवस्था के पहरुए हैं। सूरज की पहली किरण के साथ हैण्डपम्पों पर लम्बी कतारों की कहानी शुरू हो जाती है।
पेयजल संकट को लेकर क्लास ले सकते हैं सीएम
बुन्देलखण्ड में पेयजल संकट को लेकर संजीदगी दिखा रही योगी सरकार फि़लहाल कितना कामयाब होती है इससे निपटने में यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन जिस हिंसाब से पिछले हफ्ते चार जनपदों के जल निगम के जिम्मेदारों पर गाज गिरी है, ऐसे में सीएम योगी के चित्रकूट दौरे को लेकर विभाग का ब्लड प्रेशर बढ़ चुका है। मीडिया में पेयजल संकट को लेकर आए दिन प्रकाशित हो रही हकीकतों को यदि सीएम ने संज्ञान में लिया तो इसमें दो राय नहीं कि कोई कार्यवाही न हो परंतु विभाग भी अपने वजीरों को आगे करते हुए आंकड़ों की शतरंजी बिसात पर सीएम को घेरने का प्लान तैयार कर रहे हैं।