खनिज अधिकारी का कहना है कि अवैध खनन के विरुद्ध कार्यवाही चलती रहती है.
चित्रकूट. सरकार और प्रशासन की सख्ती के बावजूद भी खनिज माफिया जिम्मेदारों की आंखों में धूल झोंकते हुए अवैध खनन के खेल को बेधड़क खेल रहे हैं। दुर्गम इलाकों में जहां पुलिस प्रशासन जल्द नहीं पहुंच सकता वहां धड़ल्ले से इस धंधे को खनिज माफियाओं द्वारा संचालित किया जा रहा है।
आए दिन पकड़े जा रहे ट्रक ट्रैक्टर डम्फर और जेसीबी इस बात की तस्दीक स्वतः करती हैं कि किस तरह खनिज माफिया अपने मंसूबों को अमली जामा पहनाने की कोशिश कर रहे हैं। अवैध खनन के खिलाफ कार्यवाही में एक जेसीबी व डम्फर को सीज किया गया तो वहीं अन्य इलाकों से भी खनन की खबरें आ रही हैं। जनपद के भरतकूप पहाड़ी राजापुर थाना क्षेत्रों में तो रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक यह खेल चलता रहता है। हालांकि खनिज विभाग इन मसलों पर कार्यवाही की बात तो करता है लेकिन खनिज माफिया हैं की बाज नहीं आ रहे।
लाख कोशिशों के बावजूद भी पुलिस प्रशासन खनिज माफियाओं के तिलिस्म को तोड़ने में नाकाम साबित हो रहा है। पहाड़ी इलाकों में खनिज माफिया अपने मंसूबों को कामयाब करते हुए पत्थर मौरंग गिट्टी के अवैध कारोबार से मोटा मुनाफा कमा रहे हैं और सरकार को राजस्व का चूना सो अलग।
इन क्षेत्रों में सर्वाधिक खनन
जनपद के भरतकूप राजापुर पहाड़ी थाना क्षेत्र में पत्थर गिट्टी मौरंग और बालू का अवैध खनन व ढुलान सर्वाधिक रूप से होता है। बालू खदानों के पट्टे होने के बावजूद भी खनिज माफिया इस गोरखधंधे में मोटा मुनाफा कमाने के लिए लिप्त हैं। अवैध खनन के खिलाफ की गई ऐसी ही कार्यवाही में एक जेसीबी व डम्फर को पकड़ कर सीज कर दिया गया। खनिज अधिकारी मिथलेश पाण्डेय का कहना है कि अवैध खनन के विरुद्ध कार्यवाही चलती रहती है और जहां भी ऐसी कोई सूचना मिलती है वहां पहुंचने का प्रयास किया जाता है।
आसमान पर पहुंचे बालू के दाम
बालू के आधा दर्जन घाटों का पट्टा बालू खनन के लिए निर्धारित किया गया है बावजूद इसके बालू के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। ठेकेदार मनमाने रेट पर बालू की सप्लाई कर रहे हैं। सरकार के इस दावे कि गुंडा टैक्स बंद हो चुका है इसके बावजूद भी बालू 6 से 7 हजार रूपये प्रति सौ घन फीट मिल रही है। वाहन स्वामियों से कई गुना अधिक दाम लिए जा रहे हैं। इस बारे में खनिज अधिकारी मिथलेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि टेंडर के बाद विभाग का नियंत्रण घाट से समाप्त हो जाता है। फिर भी बढे हुए दाम को लेकर ठेकेदारों से बातचीत की जाएगी और समाधान निकाला जाएगा।