
चित्रकूट. निकाय चुनाव को लेकर राजनीति की बिसात पर पांसों को फेंकने का दांव शुरू हो चुका है। प्रमुख पार्टियों के सिंबल से चुनाव मैदान में ताल ठोंकने के आकांक्षी संभावित प्रत्याशी पाला बदलने का मौका देखते ही दूसरी पार्टी का सेहरा पहन रहे हैं। जमीनी कार्यकर्ता अपनी वफ़ादारी का हवाला देते हुए टिकट पाने की लालसा में बाहरियों को बैक टू पैवेलियन करने में लगे हैं। बगावती तेवर भी राजनीतिक दलों के लिए निकाय चुनाव में चुनौती देने को तैयार है। सबसे ज्यादा जद्दोजहद अनारक्षित सीटों को लेकर है। इन सीटों पर हर पार्टी का जमीनी कार्यकर्ता चुनावी दंगल में किस्मत आजमाने को आतुर है। कमोबेश यही स्थिति आरक्षण वाली सीटों पर भी है।
नगर निकाय के अध्यक्ष पद पर आसीन होने को लेकर लड़ाई तो और दिलचस्प होगी क्योंकि अनारक्षित सीट होने से राजनीतिक ख्वाबों के कई सौदागर अपना भाग्य बदलने के लिए उतावले दिख रहे हैं। निकाय चुनाव को लेकर जोड़ तोड़ गुणा गणित का खेल भी शुरू हो चुका है। सांसद विधायक की तरह पार्षदों व संभावित प्रत्याशियों की अदला बदली का दौर चालू है। कल तक बीच गंगा में खड़े होकर अपने दल के प्रति वफादार रहने और निष्ठा जताने वाले कद्दावर आज विरोधियों के खेमे में मौका देखकर उनके दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं।
सपा, बसपा, कांग्रेस और भाजपा सभी के सामने टिकट बंटवारे को लेकर मुश्किल हालात उत्पन्न होने के पूर्ण संकेत हैं, अलबत्ता भाजपा में थोड़ी दिक्कत ज्यादा होने वाली हैं क्योंकि भगवा खेमे में टिकटार्थियों की लंबी लाइन व दावेदारी है और कई बेगाने सेंध लगाने के चक्कर में भगवा चोला धारण कर चुके हैं। चित्रकूट की तीनों नगर निकायों में इस बार अध्यक्ष पद के लिए कोई आरक्षण नहीं है इसलिए मुकाबला रोचक होगा इसमें भी कोई संशय नहीं है।
जोड़ तोड़ का खेल शुरू
संभावित प्रत्याशियों पार्षदों के जोड़ तोड़ का खेल शुरू हो चुका है। किस वार्ड में किसकी हवा है और आरक्षण की गणित में कैसे फिट बैठा जा सकता है इन स्थितयों को भांपकर वर्तमान पार्षद व चुनावी पहलवान राजनीतिक पार्टियों के दरवाजों को खटखटा रहे हैं। जोड़ तोड़ की इसी गुणा गणित के तहत कर्वी नगर पालिका परिषद के आधा दर्जन से अधिक पार्षद कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस के इस पांसे ने विपक्षियों की बेचैनी थोड़ी बढ़ा दी है। बीजेपी व सपा में अभी तक यह दौर चल रहा था लेकिन कांग्रेस ने भी तुरुप का पत्ता चल दिया। शामिल पार्षद अपने इलाके में अच्छी पकड़ के लिए जाने जाते हैं। बसपा भी आरक्षण की गणित को साधते हुए निकाय चुनाव की रणनीति बना रही है।
दावेदारों की चहलकदमी शुरू
जनपद की तीनों नगर निकायों में अध्यक्ष पद को लेकर दावेदारों की चहलकदमी शुरू हो गई है। पार्टियों में आवेदन की प्रक्रिया भी जारी है। बीजेपी में अब तक 25 दावेदारों ने नगर पालिका परिषद कर्वी के अध्यक्ष पद के लिए आवेदन किया है। राजापुर नगर पंचायत से अध्यक्ष पद के लिए 13 दावेदारों ने अपनी ताल ठोंकी है। कांग्रेस व सपा में भी कुछ दिनों में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। बसपा भी मजबूत दावेदार की तलाश में है। कई अपनों की दावेदारी से सभी पार्टियों में असमंजस की स्थिति है। सबसे ज्यादा बीजेपी की मुश्किलें अपनों व बाहरियों में विभेद करने को लेकर है। यूपी विधानसभा चुनाव में चंद दिनों पहले शामिल हुए अधिसंख्य लोगों को पार्टी ने टिकट दिया था जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराज़गी का एहसास भी पार्टी को झेलना पड़ा था। अब निकाय चुनाव में यही कार्यकर्ता टिकट मिलने की टकटकी लगाए फिर एक बार अपनी पार्टी के हाई कमान की ओर निहार रहे हैं।
लखनऊ दिल्ली तक पहुंच तो स्थानीय को तवज्जो क्यों
विभिन्न दलों में शामिल होने वाले मठाधीश भले ही जनपद स्तर पर पार्टियों के तंबू में बैठे दिखाई पड़ते हों लेकिन उनकी सारी गुणा गणित पार्टी के लखनऊ और दिल्ली हाईकमान से सेट हो रही है और शायद यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं को ज़्यादा तवज्जो नहीं मिल रही। इस बात को लेकर सभी प्रमुख दलों खासतौर पर कांग्रेस व बीजेपी में जमीनी कार्यकर्ताओं के बगावती तेवर की सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है।
हाईकमान के साथ बैठकों का दौर
चुनाव में विजयी पताका लहराने के लिए हर पार्टी लालायित है। लखनऊ से आ रहे पार्टी पदाधिकारी कार्यकर्ताओं की नब्ज़ टटोलने में लगे हैं। दावेदारों की लिस्ट भी उनके हांथ में है और चुनावी रणनीति को लेकर कार्यकताओं से विचार विमर्श भी हो रहा है। बीजेपी के क्षेत्रीय मंत्री (कानपुर व बुंदेलखण्ड) राजेश्वर सिंह पदाधिकारियों व कार्यकताओं के साथ बैठक कर चुके हैं तो वहीं कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय प्रकाश व महासचिव सुधाकर त्रिपाठी भी बैठक कर पार्टी की रणनीति पर विचार विमर्श कर चुके हैं। सपा व बसपा के भी उच्च पदाधिकारियों के आने का कार्यक्रम है।