बदहाल विद्युत व्यवस्था के बीच बिजली कर्मचारी संगठनों का प्रदर्शन निजीकरण के विरोध में सड़कों पर जारी है।
चित्रकूट. बदहाल विद्युत व्यवस्था के बीच बिजली कर्मचारी संगठनों का प्रदर्शन निजीकरण के विरोध में सड़कों पर जारी है। विभिन्न संगठन एक छत के नीचे संयुक्त रूप से आन्दोलनरत होते हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं। कर्मचारियों का एक स्वर में कहना है कि याचना नहीं अब रण होगा। यानि कर्मचारी निजीकरण की व्यवस्था के खिलाफ अब आर पार की लड़ाई का मन बना चुके हैं। मुख्यालय में चल रहे धरना प्रदर्शन और नारेबाजी के बीच विद्युत् कर्मी सरकार से अपने कदम पीछे खींचने की मांग कर रहे हैं। हालांकि अधिकारीयों की बार-बार वार्ता के बावजूद भी आन्दोलनरत कर्मचारी किसी पक्के आश्वासन के न मिलने तक शांत न होने के मूड में हैं।
प्रदेश के पांच जिलों (लखनऊ, बनारस, गोरखपुर, मेरठ और मुरादाबाद) के विद्युत विभागों के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी सड़कों पर उतर आए हैं। एक स्वर में एक ही छत के नीचे संयुक्त रूप से सरकार और अधिकारीयों के खिलाफ हुंकार भरते हुए कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण के फैसले को जल्द न वापस लिया गया तो लखनऊ और दिल्ली में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन करते हुए विधानसभा और संसद का घेराव किया जाएगा। वक्ताओं ने कर्मचारियों में जोश भरते हुए कदम पीछे न खींचने का आह्वाहन किया।
सभी संगठन हुए शामिल-
विद्युत्वि कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले एकत्रित विरोध प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ सहित हाइड्रो ईलेक्ट्रिक इम्प्लाइज यूनियन, राज्य विद्युत् इंजीनियर संघ और विद्युत् मजदूर संघ, विद्युत् मजदूर पंचायत, राज्य विद्युत् परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ भी शामिल है। इन सभी संगठनों के विभागीय कर्मचारियों ने निजीकरण के खिलाफ एक साथ लड़ाई का एलान किया। कर्मचारियों का कहना था कि कई चुनौतियों से जूझते हुए बिजली कर्मचारी अपना काम करते हैं फिर भी सरकार और अधिकारी उनके शोषण पर उतारू है। कर्मचारियों ने जिम्मेदारों को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र गम्भीरता से विचार न किया गया तो आने वाले दिनों में बुंदेलखण्ड में और बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
बदहाल विद्युत् व्यवस्था के बीच जिम्मेदारों और कर्मचारियों की लड़ाई-
विद्युत् कर्मचारियों और जिम्मेदारों के बीच आपसी लड़ाई से आने वाले दिनों में विद्युत् व्यवस्था और चरमराने का अंदेशा है। कर्मचारियों द्वारा कई बार इस विषय को लेकर आंदोलन और धरना प्रदर्शन किया गया, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। अब सभी संगठन एक स्वर में आर पार की लड़ाई का एलान करते हुए सड़क से संसद तक आंदोलन करने का मन बना चुके हैं। कर्मचारियों ने शोषण न बर्दाश्त करने की चेतावनी दी है। अपनी विभिन्न मांगों को भी सामने रखते हुए विद्युत् कर्मियों ने सरकार पर हीलाहवाली का आरोप लगाया और हितों की अनदेखी की बात कही।Cr