
चित्रकूट. चित्रकूट के मानिकपुर जंक्शन रेलखण्ड पर हुए वास्को-डि-गामा पटना एक्सप्रेस हादसे के बाद फिर वही राग जांच एजेंसियों तथा रेलवे द्वारा अलापा जा रहा है कि घटना की जांच की जाएगी। एटीएस को भी जांच का जिम्मा सौंप दिया गया है परंतु अभी तक एटीएस ने कितने रेल हादसों की जांच रिपोर्ट अंतरिम रूप से पूरी की है यह सभी जानते हैं। इन सबके बीच फिर एक बार इस रेलखण्ड पर हजारों यात्रियों की जान माल का वो नुकसान नहीं ईश्वरीय अनुकम्पा से जिसका अंदाजा दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन को देखकर लगाया जा सकता है। धीमी गति ने एक भयावाह हादसे को रोक लिया। हालांकि तीन यात्रियों को मौत ने अपनी आगोश में ले लिया जबकि 8 यात्री घायल हो गए और अस्पताल में भर्ती हैं। यदि ट्रेन की रफ़्तार तेज होती तो यह बिल्कुल स्पष्ट था कि ये अब तक का सबसे भीषण हादसा हो जाता और जान माल का नुकसान भी कल्पना से परे होता।
भारतीय रेल यानि हादसों का दूसरा नाम, जी हां अब कुछ ऐसा ही तमगा लग चुका है भारतीय रेलवे पर। आए दिन होते हादसे सुरक्षा के दम्भो की कलई खोल देते हैं। हर हादसे के बाद जांच की घुट्टी पिलाकर सब कुछ शांत। घटनास्थल का दौरा कर अधिकारी फिर से अपने वातानुकूलित कमरों में आराम फ़रमाने लगते हैं। यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ और लापरवाही का अधिकार रेलवे को न जाने किस अधिकार के तहत हासिल हो गया है कि हर हादसों के बाद सिर्फ बयानबाजी और जांच कराने की बात कहकर अपना कुर्ता साफ़ कर लिया जाता है। यात्रियों की जान अब तो ऊपरवाले के भरोसे पर सौ प्रतिशत हो गई है रेल यात्रा के दौरान क्योंकि न जाने कब कहां कैसे ट्रेन हादसे का शिकार हो जाए।
धीमी गति ने रोका भीषण हादसा
पटना जा रही वास्को-डि-गामा पटना एक्सप्रेस उस समय दुर्घटनाग्रस्त हुई जब ट्रेन मानिकपुर जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 2 से गुजर रही थी। चूंकि ट्रेन प्लेटफार्म से गुजर रही थी और गति भी धीमी थी इसलिए भीषण हादसे की स्थिति यानि हजारों यात्रियों की जानमाल को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ अन्यथा तेज रफ़्तार में यदि यह दुर्घटना होती तो मंजर का अंदाजा लगाया जा सकता है। भोर में करीब साढ़े 4 बजे यह हादसा हुआ। उस समय भी अधिकतर यात्री नींद की आगोश में थे। जो यात्री जगे हुए थे उनमें चीख पुकार मच गई।
मौत को सामने देख सहम गए यात्री
सकुशल बच गए यात्रियों में से कुछ ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि वे लोग सो रहे थे कि तेज आवाज के साथ ट्रेन लड़खड़ाने लगी और ऐसा लगा कि शायद किसी पहाड़ से ट्रेन नीचे उतर रही है। दुर्घटनाग्रस्त एक बोगी के यात्री ने बताया कि उनकी बोगी में नीचे से बड़ा छेद हो गया था और बोगी लड़खड़ाते हुए पटरी से उतर गई। गति धीमी होने व ऊपरवाले की कृपा से वे बच गए। ट्रेन जैसे ही प्लेटफार्म से आगे बढ़ी की 13 डिब्बे पटरी से उतर गए। इंजन से लेकर 9 डिब्बे सकुशल आगे निकल गए जबकि स्लीपर क्लास के 11 तथा सामान्य श्रेणी के दो डिब्बे बेपटरी हो गए। ट्रेन का स्टापेज मानिकपुर जंक्शन पर नहीं है।
दुर्घटना की जांच शुरू
अपनी परंपरागत शैली में रेलवे ने जांच की बात कही है। एनसीआर(उत्तर मध्य रेलवे) के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी गौरव कृष्ण बंसल ने बताया कि घटना की जांच शुरू कर दी गई है और जांच पूरी होने पर ही दुर्घटना की असली वजह पता चल पाएगी। उन्होंने बताया कि कई ट्रेनें जो प्रभावित थीं इस रूट पर उन्हें बहाल कर दिया गया है और आवागमन शुरू हो गया है। मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी के मुताबिक घटना में 9 यात्री घायल हुए हैं जबकि तीन यात्रियों की मौत हुई है। मृतक तीन यात्रियों में दो मृतक पिता पुत्र हैं। बिहार के बेतिया जिले के निवासी रामस्वरूप पटेल और उनके पुत्र दीपक पटेल की मौत हो गई जबकि तीसरा मृतक यात्री अज्ञात है। घायलों को एक एक लाख तथा मृतकों के परिजनों को सरकार 5 लाख मुआवजा देगी।
हादसों का रेलवे ट्रैक
मुंबई हावड़ा रेल मार्ग का महत्वपूर्ण रेलखण्ड मानिकपुर जंक्शन उत्तर मध्य रेलवे के इलाहाबाद डिवीजन के तहत आता है। सन् 2017 में यानी इसी वर्ष इस रेलखण्ड पर आधा दर्जन ट्रेन हादसे किसी न किसी रूप में हुए हैं। टूटी हुई पटरी से अगस्त महीने में तेज रफ़्तार से मुम्बई जाने वाली लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस गुजर गई। चलती हुई ट्रेन पर विद्युत् तार गिर पड़ा, इलेक्ट्रिक ट्रैक की टेस्टिंग के समय 25 हजार वोल्ट के करन्ट से प्रवाहित तार टूटकर ट्रैक पर गिर पड़ा गनीमत यह थी कि उस समय कोई ट्रेन उस ट्रैक से नहीं गुजर रही थी। ये कुछ चुनिंदा हादसे हैं इस वर्ष के जो थोड़े थोड़े अंतराल पर हुए। इससे पहले सन 2014 व् 15 में कई बार बड़े हादसे होते होते बच गए।