
चित्तौडगढ़: उम्र 80 वर्ष, परिवार में कोई बेटा-बेटी नहीं और खुद निरक्षर…लेकिन गांव के बच्चों की जिंदगी शिक्षा से रोशन हो, इस भावना ने मांगीबाई अहीर को ऐसा संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया कि उनकी कहानी समाज के लिए अनुकरणीय बन गई। चित्तौड़गढ़ जिले में राशमी तहसील के देवीपुरा गांव की निवासी मांगीबाई ने विद्यालय को ही मंदिर और बच्चों को भगवान मानते हुए 15 लाख रुपए विद्यालय विकास के लिए दान कर दिए।
विधवा मांगीबाई वर्तमान में अपने भतीजे देवीलाल अहीर के साथ रहती हैं। पहले धार्मिक कार्यों में दान करने वाली मांगीबाई ने अब शिक्षा को ही सबसे बड़ी सेवा मान लिया है। उन्होंने विद्यालय में पानी की टंकी, एक कक्षा-कक्ष और सरस्वती मंदिर के निर्माण सहित विभिन्न कार्यों के लिए सहयोग दिया।
उनका मानना है कि गांव के बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और आगे बढ़ें, इससे बड़ी खुशी उनके लिए कुछ नहीं है। उनके शिक्षा के प्रति इस समर्पण को जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बताते हुए शिक्षा विभाग के भामाशाहों को प्रोत्साहित करने के लिए हर महीने आठ भामाशाहों के सम्मान की पहल की है। इसी क्रम में मंगलवार को समिति कक्ष में जिला कलक्टर ने दान करने वाले भामाशाहों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
उन्होंने शिक्षा विभाग में भामाशाहों को प्रोत्साहित करने के लिए हर माह आठ भामाशाहों के सम्मान की पहल की है। ग्रामीणों की मांग पर कलक्टर ने खेल मैदान के लिए भूमि प्रबंधन, बालिका शौचालय और स्मार्ट बोर्ड के प्रस्ताव सीएसआर से स्वीकृत कराने के निर्देश दिए। कार्यक्रम में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद दशोरा, डाइट प्रधानाचार्य राजेंद्र कुमार शर्मा, समसा के एडी नरेंद्र सिंह चौहान, एसीपी दीनदयाल नारायणीवाल, पीओ शिवकुमार चावला, विनोद कुमार मूंदडा, संदर्भ व्यक्ति चित्तौडगढ़ ब्लॉक डॉ. विकास अग्रवाल, हेमेंद्र सोनी सहित अन्य उपस्थित रहे।
भादसोड़ा के मूल निवासी और अमेरिका में रह रहे एनआरआई डॉ. मुस्तफा ने गांव के बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोडने के लिए करीब 18 लाख रुपए का सहयोग किया। कम्प्यूटर लैब, शिक्षकों की व्यवस्था, इन्वर्टर, सीसीटीवी सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उन्होंने विद्या क्रांति फाउंडेशन बनाया है, जो क्षेत्र के विद्यालयों के विकास के लिए काम करेगा। वहीं राउप्रावि मडावदा की स्कूल प्रबंधन समिति ने 150 घरों वाले गांव के प्रत्येक परिवार को विद्यालय से जोड़ा और करीब 5 लाख रुपए जुटाकर स्कूल का विकास कराया।
मोरवन के प्रकाश टेलर ने 1.50 लाख, डूंगला के सेवानिवृत्त व्याख्याता नरेश कुमार मालू ने 1.11 लाख, जाशमा के सम्पतलाल बोरदिया ने एक लाख तथा सेवानिवृत्त अध्यापिका तुलसी जोशी और सुदरी के प्रहलाद जाट ने 51-51 हजार रुपए विद्यालय विकास के लिए दिए। सभी का भामाशाह के रूप में सम्मान किया गया।