चित्तौड़गढ़

Badi Sadri Neemuch Rail Project: बड़ी सादड़ी-नीमच रेल परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, 110 KMPH के स्पीड ट्रायल से रचा इतिहास

Rajasthan Railway News: बड़ीसादड़ी-नीमच रेल परियोजना में 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सफल स्पीड ट्रायल पूरा हो गया है। अब सीआरएस निरीक्षण के बाद इस ट्रैक पर जल्द ही यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू होने की उम्मीद है।

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निरीक्षण से पूर्व पूजा करते अधिकारी। फोटो- पत्रिका

बड़ी सादड़ी। मेवाड़ और मालवा को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित बड़ी सादड़ी-नीमच रेल परियोजना अब अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंच गई है। मंगलवार और बुधवार को क्षेत्रवासियों के लिए वह ऐतिहासिक पल आया, जब नवनिर्मित ट्रैक पर रेल इंजन ने 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ लगाई।

जलोदा जागीर से बड़ी सादड़ी स्टेशन के बीच हुए इस स्पीड ट्रायल की सफलता ने न केवल ट्रैक की मजबूती को साबित किया है, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास के नए द्वार भी खोल दिए हैं। लंबे समय से इस परियोजना का इंतजार कर रहे लोगों में अब उत्साह का माहौल है।

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तकनीकी कसौटी पर खरा उतरा ट्रैक

दो दिवसीय इस परीक्षण के दौरान रेलवे के उच्चाधिकारियों की पैनी नजर ट्रैक की स्थिरता, सुरक्षा मानकों और विद्युतीकृत प्रणालियों पर रही। इंजन ने जब निर्धारित गति सीमा को छुआ, तो पटरियों ने यह संकेत दे दिया कि अब यहां भारी मालगाड़ियों और तेज रफ्तार एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन दूर नहीं है।

निर्माण उप अधीक्षक अंकित गुप्ता और अधिशासी अभियंता राजाराम मीणा ने इस परीक्षण को बेहद संतोषजनक बताया। स्पीड ट्रायल के दौरान सेक्शन इंजीनियर रितेश कुमार, स्टेशन अधीक्षक पीएस मीणा और लोको पायलट भगवतीलाल मीणा सहित तकनीकी स्टाफ मौजूद रहा। ट्रायल के सफल रहने से रेलवे अधिकारियों में भी संतोष देखा गया।

अब फाइनल टच और यात्री सेवाओं की बारी

इस सफल ट्रायल के बाद अब सबकी नजरें कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी के अंतिम निरीक्षण पर टिकी हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार, अगले कुछ ही दिनों में सीआरएस की टीम ट्रैक का बारीकी से मुआयना करेगी। उनकी हरी झंडी मिलते ही बड़ी सादड़ी से नीमच के बीच नियमित यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा। वर्तमान में जलोदा जागीर से आमेट तक का विद्युतीकृत ब्रॉडगेज ट्रैक पूरी तरह तैयार हो चुका है। इससे क्षेत्र के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

दशकों पुराना संघर्ष लाया रंग

यह उपलब्धि केवल तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि रेलवे संघर्ष समिति के लंबे आंदोलनों की जीत भी है। मेवाड़, मालवा और मारवाड़ को ब्रॉडगेज के जरिए एक सूत्र में पिरोने की मांग कई दशकों पुरानी है। ट्रायल के साक्षी बने समिति के सदस्य कांतिलाल दक और अशोक सोनी ने भावुक होते हुए कहा, यह केवल ट्रेन की रफ्तार नहीं, बल्कि हमारे क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने वाली प्रगति की रफ्तार है। इस परियोजना के पूरा होने से व्यापार, रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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