चित्तौड़गढ़

Chittorgarh: भाजपा नेता पर FIR से हड़कंप, आयुक्त बोले… चेंबर में ‘सबक सिखाने’ की दी धमकी

BJP Councillor Controversy: चित्तौड़गढ़ में भाजपा सरकार और नगर पालिका में प्रशासक शासन के बीच सियासत गर्मा गई है। पालिका आयुक्त कौशल कुमार खटुम्बरा ने पूर्व भाजपा पार्षद मयंक अग्रवाल के खिलाफ कोतवाली थाने में संगीन धाराओं में मामला दर्ज कराया है।
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पत्रिका फाइल फोटो
पत्रिका फाइल फोटो

BJP Councillor Controversy: चित्तौड़गढ़ में भाजपा सरकार और नगर पालिका में प्रशासक शासन के बीच सियासत गर्मा गई है। निम्बाहेड़ा नगर पालिका का कार्यकाल पूरा होने और बोर्ड भंग होने के बाद अब सत्ता के रसूख और प्रशासनिक मर्यादा के बीच सीधी जंग चल रही है। ताजा मामले में, पालिका आयुक्त कौशल कुमार खटुम्बरा ने पूर्व भाजपा पार्षद मयंक अग्रवाल के खिलाफ कोतवाली थाने में संगीन धाराओं में मामला दर्ज कराया है।

सत्ता की हनक या प्रशासनिक कर्तव्य?

वर्तमान में निम्बाहेड़ा नगर पालिका में कोई निर्वाचित बोर्ड अस्तित्व में नहीं है और पूरी कमान प्रशासक के पास है, ऐसे में पूर्व पार्षद मयंक अग्रवाल पर लगे आरोपों ने राजनीतिक चर्चाएं तेज कर दी हैं। आयुक्त का आरोप है कि मयंक अग्रवाल ने देर रात इंटरनेट कॉल्स के जरिए उन्हें न केवल डराया-धमकाया, बल्कि कार्यस्थल पर आकर 'सबक सिखाने' की धमकी भी दी। एक तरफ केंद्र और राज्य में भाजपा की डबल इंजन सरकार है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने सत्ताधारी दल के नेता के खिलाफ मोर्चा खोलकर यह साफ कर दिया है कि राजकीय कार्यों में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गैर-जमानती धाराओं में फंसा पेच

आयुक्त ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 351 और 121 के तहत रिपोर्ट दी है। ये धाराएं किसी लोक सेवक को डराने और सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़ी हैं, जो गंभीर और गैर-जमानती श्रेणी में आती हैं। आयुक्त ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य के दौरान इस तरह की धमकियां न केवल प्रशासन का मनोबल गिराती हैं, बल्कि कानून व्यवस्था को भी चुनौती देती हैं।

साक्ष्यों के घेरे में भाजपा नेता

पुलिस को सौंपे गए शिकायती पत्र में व्हाट्सएप मैसेज और कॉल स्क्रीनशॉट का हवाला दिया गया है। आयुक्त ने दो टूक कहा है कि भविष्य में यदि उनके या किसी कर्मचारी के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसके लिए मयंक अग्रवाल सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे।

मामला हाई-प्रोफाइल होने के कारण क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। पूर्व पार्षद मयंक अग्रवाल का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि बोर्ड भंग होने के बाद प्रशासनिक कामकाज को लेकर विवाद की असली जड़ क्या है।

Updated on:
11 May 2026 11:26 am
Published on:
11 May 2026 11:26 am