चित्तौड़गढ़

राजस्थान की इस ग्राम पंचायत में लगातार 7वीं बार बिना इलेक्शन बना सरपंच, सभी वार्ड पंच भी सर्वसम्मति से चुने गए

Rajasthan Sarpanch Election: राजस्थान की केसुंदा ग्राम पंचायत ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। यहां 7वीं बार निर्विरोध सरपंच चुना गया है। खास बात यह है कि सरपंच ही नहीं उपसरपंच सहित सभी पंचों का चुनाव भी पूरी तरह सर्वसम्मति से हुआ है।
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Updated: 4 Nov 2026, 6:08 PM IST
केसुंदा ग्राम पंचायत चुनाव सरपंच
केसुंदा में फिर जीता भाईचारा: शांतिबाई भील सर्वसम्मति से बनीं सरपंच, Photo- Patrika

Rajasthan Sarpanch Election: निंबाहेड़ा (चित्तौड़गढ़)। जहां आज के दौर में चुनाव का मतलब रैलियों का शोर, पोस्टर-बाजी, बयानबाजी और कई बार आपसी मनमुटाव या चुनावी रंजिश बन चुका है, वहीं निंबाहेड़ा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत केसुंदा ने देश के सामने लोकतंत्र की एक ऐसी खूबसूरत तस्वीर पेश की है, जो सियासत की परिभाषा ही बदल देती है। यहां एक बार फिर चुनावी प्रतिस्पर्धा को दरकिनार करते हुए आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता की मिसाल कायम की गई है।

केसुंदा पंचायत के सभी पदों पर मुकाबला न होना बना चर्चा का विषय

केसुंदा ग्राम पंचायत ​के ग्रामीणों की सामूहिक सहमति से लगातार सातवीं बार सरपंच, उपसरपंच सहित सभी वार्ड पंचों का निर्विरोध निर्वाचन संपन्न हुआ है। पंचायत के सभी पदों पर एक भी मुकाबला न होना पूरे क्षेत्र में चर्चा और कौतुक का विषय बना हुआ है। इस बार की प्रक्रिया में सरपंच शांतिबाई भील, उपसरपंच भरत आंजना, वार्ड पंच अतुल आंजना, संतोष मेनारिया, रमेश गायरी, कला आंजना, अजय सुथार, रानू गांधी, गुड्डी बाई मीणा एवं नरेंद्र मेघवाल को निर्विरोध चुना गया है।

लगातार सात बार से बिना मतदान चल रही है पंचायत

केसुंदा पंचायत का लगातार सातवीं बार निर्विरोध चुना जाना कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह दशकों से चली आ रही उस परंपरा का विस्तार है जो ग्रामीणों के आपसी विश्वास और सामूहिक निर्णय क्षमता को मजबूत करती है। चुनावी दंगल और हार-जीत के तनाव से कोसों दूर यह गांव हर बार यह साबित करता है कि जनता का असली विकास जोड़-तोड़ से नहीं, बल्कि आपसी सहयोगात्मक रवैये से ही संभव है।

निर्विरोध निर्वाचन के बाद ग्रामीणों ने सभी नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें बधाइयां दीं। इस दौरान जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा जताई गई कि वे गांव के विकास, मूलभूत जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और जनहित के कार्यों को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएंगे।

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4 Nov 2026, 6:08 PM IST
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