28 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

राजस्थान में खेती का नया ट्रेंड: 3 साल में 8 गुना बढ़ी मांग, रिकॉर्ड 75 हजार पौधे बिके

चित्तौड़गढ़ जिले में गेंदे की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। तीन साल में मांग आठ गुना बढ़कर रिकॉर्ड 75 हजार पौधों की बिक्री हुई है। कम लागत और बंपर मुनाफे के चलते किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर गेंदे की खेती अपना रहे हैं।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

चित्तौड़गढ़

•

image

Arvind Rao

•

Updated: 28 Oct 2026, 4:46 PM IST

chittorgarh marigold farming

चित्तौड़गढ़ जिले में ओछड़ी स्थित एक खेत में लगी गेंदे के फूलों की फसल (पत्रिका फोटो)

Chittorgarh Marigold Farming: जिस गेंदे के फूल के लिए कभी चित्तौड़गढ़ जिलेवासियों को पड़ोसी जिलों और बाहरी मंडियों का रुख करना पड़ता था, वही गेंदा अब चित्तौड़गढ़ की धरती पर पीला सोना बनकर महक रहा है। कम देखभाल और हाथों-हाथ नकद कमाई के चलते गेंदे की खेती अब जिले के किसानों की पसंद बनती जा रही है। आलम यह है कि जिले के साड़ास, विजयपुर, भदेसर, निंबाहेड़ा और चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में कई किसान पारंपरिक फसलों के साथ गेंदे का भी बंपर उत्पादन कर रहे हैं।

लगातार बढ़ रही मांग

गेंदे की खेती के प्रति किसानों के बढ़ते रुझान का अंदाजा सीताफल उत्कृष्टता केंद्र के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। केंद्र के अनुसार, वर्ष 2023-24 में जहां केवल 9 हजार पौधों की बिक्री हुई थी, वहीं वर्ष 2024-25 में 1,500 पौधे बिके। इसके बाद मांग में तेजी से इजाफा हुआ। वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 71 हजार पहुंच गया। चालू वर्ष में अब तक रिकॉर्ड 75 हजार पौधों की बिक्री हो चुकी है।

ऐसे बढ़ रहा मुनाफा: खुले फूल 20-25 रुपए किलो, माला बनाकर बेचने पर 100 रुपए तक

गेंदे की खेती में मुनाफा बढ़ाने में विपणन का तरीका अहम भूमिका निभा रहा है। बाजार में खुले गेंदे के फूल सामान्य तौर पर 20 से 25 रुपए प्रति किलो के भाव बिकते हैं। वहीं, किसान थोड़ी मेहनत करके इनकी मालाएं बनाकर बेचते हैं, तो एक किलो फूल से करीब 100 रुपए तक की बिक्री हो सकती है। इस तरह फूलों को माला बनाकर बेचने से कमाई पांच गुना तक पहुंच सकती है। काश्तकार रतनीबाई ने बताया कि कम लागत, कम पानी और कम देखभाल में बेहतर कमाई की संभावना ने गेंदे को चित्तौड़गढ़ के खेतों की नई पहचान बना दिया है।

एक बीघा में 6 हजार पौधे, दो किस्मों की धूम

सीताफल उत्कृष्टता केंद्र के उपनिदेशक (उद्यान अनुसंधान) रमेश आमेटा के अनुसार, एक बीघा खेत में करीब 6 हजार गेंदे के पौधे लगाए जाते हैं। फिलहाल खेतों में दो प्रमुख किस्मों टेनिस बॉल और पुष्पराज केसरिया की अच्छी पैदावार हो रही है। इनकी पंखुड़ियां घनी होती हैं और रंग आकर्षक होता है। यही वजह है कि बाजार में पहुंचते ही फूलों की अच्छी मांग रहती है।

बड़ी खबरें

View All

चित्तौड़गढ़

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग