सेना के जवान पहलवान गुर्जर का दिल्ली में हृदय गत्ति रुकने से निधन हो गया। शुक्रवार को पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के धीरजी का खेड़ा गांव ने अपने एक वीर सपूत को खो दिया। भारतीय सेना में तैनात जवान पहलवान गुर्जर (27) के आकस्मिक निधन की खबर जैसे ही गांव पहुंची पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शुक्रवार को जब उनका पार्थिव शरीर गांव लाया गया तो हर किसी की आंखें नम हो गई और पूरा गांव गमगीन हो गया।
पहलवान गुर्जर की पार्थिव देह के धीरजी का खेड़ा गांव स्थित घर पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वीरांगना विद्या और मां उदी बाई अपने लाल से लिपटकर विलाप करती रहीं। इस दौरान वहां मौजूद हर किसी की आंखें भर आई।
सबसे भावुक क्षण तब आया, जब उनकी 3 साल की मासूम बेटी कीर्तिका ने अपने नाना की गोद में रहते हुए पिता को अंतिम सलामी दी। उसने ‘जय हिंद’ कहते हुए पुष्प अर्पित किए, जिसे देखकर हर किसी की आंखें छलक उठीं।
अंतिम संस्कार से पहले सेना की ओर से वीरांगना विद्या को तिरंगा सौंपा गया। तिरंगे को हाथ में लेते ही वह खुद को संभाल नहीं पाईं और फूट-फूट कर रोने लगीं।
उन्होंने तिरंगे को अपने माथे से लगाकर पति के प्रति सम्मान और गर्व व्यक्त किया। इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उनका अंतिम संस्कार किया गया।
पार्थिव देह के गांव पहुंचने से पहले कई किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। लोग अपने वाहनों पर तिरंगा लेकर ‘भारत माता की जय’ और ‘पहलवान गुर्जर अमर रहे’ जैसे गगनभेदी नारों के साथ श्रद्धांजलि दे रहे थे।
धीरजी का खेड़ा निवासी सेना के जवान पहलवान गुर्जर का गुरुवार को दिल्ली में हृदय गत्ति रुकने से निधन हो गया था। भारतीय सेना की 24 राजपूत रेजिमेंट में तैनात पहलवान गुर्जर दिल्ली में अपनी ड्यूटी पर थे। गुरुवार सुबह करीब 6:50 बजे उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। पहलवान गुर्जर के पिता रामलाल और बड़े भाई रमेश कृषि कार्य करते है। जवान की पत्नी विद्या और पुत्री कीर्तिका दिल्ली में उनके साथ ही रह रहे थे।
अंतिम संस्कार में विधायक चंद्रभान सिंह आक्या, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत, तहसीलदार शिव सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने वीर सपूत को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पहलवान गुर्जर ने सेना में अपनी बहादुरी से मेवाड़ का मान बढ़ाया है। देश की रक्षा के लिए उनका समर्पण और साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।