फैसला सुनाते समय न्यायाधीश ने समाज और रिश्तों के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि एक पिता अपनी संतान का सबसे बड़ा रक्षक और ढाल होता है, लेकिन जब वही रक्षक भक्षक बन जाए, तो कानून में उसके लिए कोई सहानुभूति नहीं हो सकती।
चित्तौड़गढ़। जिले की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने रिश्तों की गरिमा को तार-तार करने वाले एक बेहद संवेदनशील मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने अपनी ही दो महीने की दूधमुंही बच्ची के साथ बलात्कार करने वाले पिता को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
यह हृदयविदारक मामला 7 सितंबर 2025 का है, जब चित्तौड़गढ़ जिले में एक पिता ने अपनी ही मासूम बेटी के साथ घिनौनी हरकत की। घटना का खुलासा तब हुआ जब बच्ची की मां को पति की इस दरिंदगी का पता चला। मां ने हिम्मत दिखाते हुए तत्काल थाने में अपने पति के खिलाफ मामला दर्ज कराया। पुलिस ने भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में चालान पेश किया।
विशिष्ट न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट) लता गौड़ की अदालत में इस मामले की सुनवाई मात्र छह माह के भीतर पूरी की गई। विशिष्ट लोक अभियोजक गोपाल जाट ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की। मामले को सिद्ध करने के लिए न्यायालय में 12 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 31 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। एक महत्वपूर्ण आर्टिकल (वस्तु) को भी साक्ष्य के तौर पर रखा गया, जिसने अपराध की गंभीरता को स्पष्ट किया।
फैसला सुनाते समय न्यायाधीश लता गौड़ ने समाज और रिश्तों के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि एक पिता अपनी संतान का सबसे बड़ा रक्षक और ढाल होता है, लेकिन जब वही रक्षक भक्षक बन जाए, तो कानून में उसके लिए कोई सहानुभूति नहीं हो सकती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे जघन्य कृत्य समाज को कलंकित करते हैं और इनके प्रति किसी भी प्रकार की नरमी बरतना न्यायोचित नहीं है।
अदालत ने आदेश दिया कि यदि दोषी पिता निर्धारित 50 हजार रुपये का जुर्माना जमा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि समाज के लिए एक कड़ा संदेश भी है।