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Chittorgarh: बंदियों की पीड़ा सुन जज बोले,’कैदी हैं जानवर नहीं’…जेल प्रशासन को लगाई फटकार

Chittorgarh Jail Inspection: जेल की ऊंची दीवारों के पीछे बंदियों को मिलने वाली सुविधाओं और मानवाधिकारों की हकीकत जानने के लिए जिला एवं सेशन न्यायाधीश मान सिंह चूंडावत अचानक चित्तौड़गढ़ जिले की बेगूं सब जेल पहुंचे।

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बेगूं सब जेल का जज मान सिंह चूंडावत ने किया निरीक्षण, पत्रिका फोटो

बेगूं सब जेल का जज मान सिंह चूंडावत ने किया निरीक्षण, पत्रिका फोटो

Chittorgarh Jail Inspection: जेल की ऊंची दीवारों के पीछे बंदियों को मिलने वाली सुविधाओं और मानवाधिकारों की हकीकत जानने के लिए जिला एवं सेशन न्यायाधीश मान सिंह चूंडावत अचानक चित्तौड़गढ़ जिले की बेगूं सब जेल पहुंचे। न्यायाधीश के इस औचक निरीक्षण से जेल महकमे में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान न्यायाधीश ने न केवल बैरकों की तलाशी ली, बल्कि बंदियों के साथ जमीन पर बैठकर उनसे सीधा संवाद किया और उनकी पीड़ा सुनी। न्यायाधीश ने जेल प्रशासन से कहा कि जेल में बंदी कैदी हैं, जानवर नहीं।

जेल प्रशासन को लगाई फटकार

न्यायाधीश चूंडावत ने सबसे पहले बेगूं सब जेल की मेस (रसोई) का रुख किया। वहां बन रहे भोजन और भंडारण में रखी खाद्य सामग्री की जांच की। सामग्री के स्तर और मौके पर मिली गंदगी को देखकर असंतोष जाहिर करते हुए उन्होंने जेल प्रशासन को कड़े लहजे में चेतावनी दी कि बंदियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा, व्यवस्था सुधारें, अन्यथा जवाबदेही तय कर सख्त एक्शन लिया जाएगा।

फोन सुविधा ठप होने पर अधिकारियों को टोका

संवाद के दौरान बंदियों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उन्हें परिजनों से बात करने के लिए टेलीकम्युनिकेशन सुविधा का सुचारू लाभ नहीं मिल पा रहा है। तकनीकी खामियों के चलते वे अपनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। इस पर न्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सुधार करने और संचार तंत्र को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। न्यायाधीश ने जेल अधिकारियों से कहा कि जेल में संचार सुविधाएं नहीं होने व अपनों से संपर्क नहीं होने पर बंदी मोबाइल फोन हासिल करने जैसी घटनाओं में संलिप्त हो सकते हैं। इसलिए जेल में बंदियों को टेलीफोन सुविधा अतिशीघ्र उपलब्ध कराई जाएं

अधिकारों की अनदेखी पर सख्त रुख

निरीक्षण के दौरान न्यायाधीश ने साफ संकेत दिए कि जेल में बंदी केवल अपनी आजादी खोते हैं, अपने मूलभूत अधिकार नहीं। उन्होंने जेल परिसर की समग्र सफाई और चिकित्सा सुविधाओं का भी जायजा लिया। न्यायाधीश ने जेल उपाधीक्षक को निर्देशित किया कि व्यवस्थाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और बंदियों की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो।

ये रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान पीए सोमानी, पैनल अधिवक्ता विष्णु कुमार चतुर्वेदी, पैरा लीगल वॉलंटियर ललित कुमार पंचोली, राजकुमार शर्मा, जेल उपाधीक्षक किशनलाल मीना सहित समस्त जेल स्टाफ मुस्तैद रहा।

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