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चित्तौड़गढ़ में अनोखी मिसाल: किसान ने शादी में ‘टिटहरी’ के अंडों की सुरक्षा के लिए बदला पंडाल, लगाया गार्ड

Unique Story: आजकल जहां छोटी-सी बात पर इंसानियत शर्मसार हो जाती है, वहीं चित्तौड़गढ़ के जियाखेड़ी गांव के एक किसान ने प्रकृति के प्रति प्रेम की अनूठी मिसाल पेश की है।

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चित्तौड़गढ़

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Anand Prakash Yadav

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अरुण कंठालिया

Apr 28, 2026

टिटहरी और उसके अंडों की सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात, पत्रिका फोटो

टिटहरी और उसके अंडों की सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात, पत्रिका फोटो

Unique Story: आजकल जहां छोटी-सी बात पर इंसानियत शर्मसार हो जाती है, वहीं चित्तौड़गढ़ के जियाखेड़ी गांव के एक किसान ने प्रकृति के प्रति प्रेम की अनूठी मिसाल पेश की है। किसान उदयलाल व्यास के घर सोमवार को बेटे और दो बेटियों का विवाह था। खुशियों का माहौल था, भव्य पंडाल लगा था, लेकिन इस पूरे जश्न का केंद्र बिंदु कोई वीआईपी मेहमान नहीं, बल्कि एक 'नन्ही टिटहरी' और उसके 4 अंडे रहे।

पंडाल बदला, पर परिंदे का घर नहीं

शादी की तैयारियों के दौरान पता चला कि जहां मेहमानों के भोजन और बैठने की व्यवस्था थी, ठीक वहीं एक टिटहरी ने अंडे दिए हुए हैं। उदयलाल ने परंपरा और जीव दया को सर्वोपरि रखते हुए टेंट हाउस को तुरंत निर्देश दिए कि अंडों को हटाए बिना पंडाल का नक्शा बदल दिया जाए। किसान के निर्देशानुसार टेंट हाउस के कर्मचारियों ने बांस का घेरा बनाकर टिटहरी के घर को सुरक्षित घेरे में रखा और रंग बिरंगे रिबन लगाकर सजावट कर दी।

बांस का घेरा और 'स्पेशल गार्ड'

अंडों की सुरक्षा के लिए बकायदा बांस और रंगीन रिबन से बैरिकेडिंग की गई। उदयलाल ने एक व्यक्ति की विशेष ड्यूटी लगाई ताकि कोई मेहमान गलती से अंडों को नुकसान न पहुंचा दे। शादी में 2000 मेहमान आए, डीजे बजा, खूब शोर हुआ, लेकिन उस सुरक्षा घेरे के भीतर टिटहरी बेखौफ होकर अपने अंडों को सेती रही। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सुरक्षित ढंग से टेंट के सामान को हटाया भी गया।

खास बातें: जो उदयलाल को बनाती हैं अलग

  • फलों पर पक्षियों का हक: उदयलाल अपने बगीचे के फलों पर पक्षियों का पहला अधिकार मानते हैं, इसलिए वे कभी पेड़ों पर जाल (झाल) नहीं लगाते।
  • आजादी से प्रेम: उनके घर दो साल तक तोते का जोड़ा आता-जाता रहा, लेकिन उन्होंने कभी उन्हें पिंजरे में कैद करने की कोशिश नहीं की।
  • समाज को संदेश: पूर्व उप प्रधान रामचंद्र जोशी ने इसे समाज के लिए 'करुणा का पाठ' बताया है।

किसान उदयलाल की जुबानी

मेरे आंगन में खुशियों का अवसर था, तो मैं किसी की दुनिया कैसे उजाड़ सकता था? टिटहरी ने भरोसा करके मेरे खेत में अंडे दिए थे, उस भरोसे को बचाना मेरा धर्म था।- उदयलाल व्यास, पक्षी प्रेमी किसान

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