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राजस्थान में प्रतियोगिता परीक्षाओं की पवित्रता को भंग करने वाले दलालों और डमी अभ्यर्थियों के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने एक और बड़ा धमाका किया है। प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस सिंडिकेट के 4 प्रमुख किरदारों को पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है। इस कार्रवाई की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में वे लोग शामिल हैं, जो खुद शिक्षा विभाग का हिस्सा हैं।
जानकारी के अनुसार, SOG की टीम ने एक खुफिया इनपुट के आधार पर जाल बिछाया और 3 अलग-अलग प्रकरणों में संलिप्त 4 आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है-
अशोक बिश्नोई: इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड और मुख्य दलाल।
मनोहर लाल: द्वितीय श्रेणी शिक्षक (जो डमी कैंडिडेट बनकर बैठा)।
सुनील: तृतीय श्रेणी शिक्षक।
अशोक ज्याणी: डमी अभ्यर्थी।
SOG की जांच में सामने आया है कि अशोक बिश्नोई दलाल की भूमिका निभाता था। उसका काम असली अभ्यर्थी की जगह बैठने के लिए 'टैलेंटेड' डमी कैंडिडेट्स को ढूंढना था।
इस पूरे मामले का सबसे दुखद पहलू यह है कि आरोपी मनोहर लाल और सुनील पहले से ही शिक्षक के रूप में सरकारी सेवा दे रहे थे। SOG अब इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि क्या इन दोनों ने अपनी खुद की भर्ती परीक्षा भी डमी कैंडिडेट बिठाकर तो पास नहीं की थी? यदि ऐसा पाया जाता है, तो यह शिक्षा विभाग में एक बड़े शुद्धिकरण अभियान की शुरुआत होगी।
ADG SOG के नेतृत्व में चारों आरोपियों से सघन पूछताछ की जा रही है। सूत्रों की मानें तो अशोक बिश्नोई ने राजस्थान की पिछली कई बड़ी भर्तियों (जैसे REET, सब-इंस्पेक्टर और शिक्षक भर्ती) में डमी कैंडिडेट बिठाने की बात कबूली है। इस गिरफ्तारी के बाद कई अन्य सरकारी कर्मचारी और दलाल भी SOG के रडार पर आ गए हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट कर दिया था कि पेपर लीक और डमी माफिया को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। SOG की यह ताज़ा कार्रवाई उसी नीति का हिस्सा है। प्रदेश के ईमानदार युवाओं के बीच इस कार्रवाई से एक बार फिर विश्वास जागा है कि अब मेहनत करने वालों को ही हक मिलेगा।
Updated on:
02 May 2026 04:16 pm
Published on:
02 May 2026 04:15 pm
