
Cobra Rescue: चित्तौड़गढ़ जिला कलक्ट्रेट परिसर के रजिस्ट्रार कार्यालय में उस समय दहशत फैल गई जब वहां एक बेहद खतरनाक और विषैला काला नाग कोबरा घुस आया। कलक्ट्रेट जैसी संवेदनशील जगह पर पौने 5 फीट लंबे जहरीले नाग को देखकर कर्मचारियों और आमजन के हाथ-पांव फूल गए। सांप की खबर फैलते ही कर्मचारी और दफ्तर में आए लोग बाहर भागे।
सूचना के बाद मौके पर पहुंचे पर्यावरण संरक्षण समिति के सदस्य मयूर गोसावी ने कड़ी मशक्कत के बाद कोबरा काे रेस्क्यू किया। किसी अन्य जीव से संघर्ष में सांप घायल पाया गया। घायल सांप का फिलहाल पशु चिकित्सकों की देखरेख में उपचार चल रहा है, जिसे पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद घने जंगल में छोड़ा जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर चित्तौड़गढ़ जिले में वन विभाग की कार्यप्रणाली और उसकी तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। वन्यजीवों को रेस्क्यू करने का जि़म्मा उठाने वाला विभाग पूरी तरह लाचार नजर आ रहा है। करोड़ों के बजट के दावों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि विभाग के पास एक सक्रिय रेस्क्यू टीम और संसाधनों तक का अभाव है। यदि पर्यावरण समिति के सदस्य समय पर न पहुंचें तो बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता। विभाग की इस कुंभकर्णी नींद को लेकर अब आमजन में भारी आक्रोश है।
वन विभाग की घोर निष्क्रियता के बीच पर्यावरण संरक्षण समिति के सदस्य मसीहा बनकर सामने आ रहे हैं। शहर या आस-पास जब भी 30 से 40 फीट गहरे कुएं में कोई वन्यजीव गिरता है तो वन विभाग हाथ खड़े कर लेता है। ऐसे मुश्किल हालातों में समिति के सदस्य रस्सी के सहारे गहरे कुएं में उतरकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते हैं।
समिति अध्यक्ष मनीष तिवारी ने बताया कि हाल ही में गंगरार के अमोलिया गांव में 40 फीट गहरे कुएं से मृत पैंथर के शव को समिति सदस्य पीयूष कांबले और मुबारिक खान ने बाहर निकाला। वहीं मुंगा का खेड़ा गांव में कुएं से एक युवक का शव निकालने के दौरान तीन सांप दिखने पर भी समिति के जांबाज ही कुएं में उतरे और सांपों का पहले रेस्क्यू कर शव को बाहर निकलवाया। सवाल यह है कि आखिर कब तक वन्यजीवों और इंसानों की सुरक्षा का यह जिम्मा जन-सहयोग और समितियों के भरोसे चलता रहेगा।
वर्षा ऋतु के दौरान सांप एवं अन्य वन्यजीव भोजन और सुरक्षित आश्रय की तलाश में मानव बस्तियों तक पहुंच जाते है। ऐसे समय में धैर्य एवं जागरुकता का परिचय देना आवश्यक है। वन्यजीवों की हत्या करना पर्यावरण के हानिकारक है। कहीं भी सांप या अन्य जीव नजर आने पर समिति के सदस्य सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचते हैं।