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चित्तौड़गढ़ में अनूठी पहल, दंगाइयों से पुलिस को बचाने वाली ढाल अब बनी नन्हे पौधों का सुरक्षा कवच

Tree Guard Project: चित्तौड़गढ़ में कानून-व्यवस्था और दंगे जैसे आपात हालातों में पथराव से पुलिसकर्मियों का सिर-बदन बचाने वाली खाकी की ढाल अब पर्यावरण को नया जीवन दे रही है। चित्तौड़गढ़ पुलिस ने कबाड़ से जुगाड़ की तर्ज पर एक ऐसी अनूठी और अनुकरणीय पर्यावरण पहल की है।
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चित्तौड़गढ़

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Anand Prakash Yadav

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रमेश टेलर

Jun 27, 2026

Chittorgarh Police environment initiative

पुलिस ने कबाड़ हो चुकी ढाल को बनाया ट्रीगार्ड, पत्रिका फोटो

Tree Guard Project: चित्तौड़गढ़ में कानून-व्यवस्था और दंगे जैसे आपात हालातों में पथराव से पुलिसकर्मियों का सिर-बदन बचाने वाली खाकी की ढाल अब पर्यावरण को नया जीवन दे रही है। चित्तौड़गढ़ पुलिस ने कबाड़ से जुगाड़ की तर्ज पर एक ऐसी अनूठी और अनुकरणीय पर्यावरण पहल की है। पुलिस लाइन में वर्षों से नाकारा घोषित होकर धूल फांक रही लकड़ी की करीब 125 ढालों को अब नन्हे पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड के रूप में तैनात कर दिया गया है।

हेलीपैड ग्राउंड के पास महक रहे 100 से अधिक पौधे

करीब दो-तीन माह पहले पुलिस लाइन के हेलीपैड ग्राउंड के पास 100 से अधिक छायादार और फूलदार पौधों का रोपण किया गया था। पौधे अभी काफी छोटे हैं ऐसे में इन्हें तेज धूप, तेज हवा और मवेशियों से बचाने के लिए ट्री-गार्ड की सख्त दरकार थी। पुलिस लाइन के रिजर्व इंस्पेक्टर अनिल पांडेय ने बताया कि तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी के निर्देशन में इस समस्या का बेहद रचनात्मक समाधान निकाला गया।

10 साल से बेकार पड़ी थीं ढाल

पुलिस लाइन के स्टोर में पिछले 10 वर्षों से लकड़ी की करीब 125 से अधिक ढालें कबाड़ के रूप में बेकार पड़ी थीं। अमूमन एक समय सीमा के बाद विभाग इन्हें नाकारा घोषित कर जमा कर लेता है जिसके बाद ये व्यर्थ हो जाती हैं। पुलिस ने इन्हीं ढालों को पौधों के चारों तरफ सुरक्षा कवच (ट्री-गार्ड) के रूप में लगा दिया। ट्रीगार्ड के रूप में लकड़ी की ढालें लगाने से अब पौधों को पनपने के लिए सुरक्षित माहौल मिलेगा।

धूप-हवा का परफेक्ट कॉम्बिनेशन

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ये ढालें विशुद्ध रूप से लकड़ी की बनी हुई हैं। इसके चलते पौधों को चारों तरफ से बंद करने के बावजूद प्राकृतिक रूप से पर्याप्त हवा पानी और आवश्यकतानुसार धूप आसानी से मिल पा रही है। इससे पौधों की ग्रोथ में कोई बाधा नहीं आ रही है और वे तेजी से लहलहा रहे हैं। इनको लगाने से नए लोहे या प्लास्टिक के ट्री-गार्ड खरीदने का सरकारी खर्च बचा, कबाड़ का बेहतरीन पुन: उपयोग हुआ। खाकी का मानवीय और प्रकृति-प्रेमी चेहरा सामने आया। पुलिस की इस अनूठी पर्यावरण पहल की शहर में प्रशंसा हो रही है।

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