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Chittorgarh: चाय-नाश्ते की आड़ में ढाबे पर काला कारोबार, हाईवे पर मिला अवैध ईंधन का अंडरग्राउंड नेटवर्क

Fuel Smuggling Racket: चित्तौड़गढ़-कोटा नेशनल हाईवे पर चाय-नाश्ते के बोर्ड के पीछे छिपे काले कारोबार का बुधवार देर शाम पर्दाफाश हो गया। पारसोली थाना क्षेत्र में हाईवे किनारे संचालित एक ढाबे पर पुलिस और जिला रसद विभाग की संयुक्त टीम ने अचानक सर्जिकल स्ट्राइक की।
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चित्तौड़गढ़

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Anand Prakash Yadav

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Updated: 25 Jun 2026, 8:30 AM IST

Highway Dhaba Raid

हाईवे पर ढाबे में मिला अवैध ईंधन का स्टॉक, पत्रिका फोटो

Fuel Smuggling Racket: चित्तौड़गढ़-कोटा नेशनल हाईवे पर चाय-नाश्ते के बोर्ड के पीछे छिपे काले कारोबार का बुधवार देर शाम पर्दाफाश हो गया। पारसोली थाना क्षेत्र में हाईवे किनारे संचालित एक ढाबे पर पुलिस और जिला रसद विभाग की संयुक्त टीम ने अचानक सर्जिकल स्ट्राइक की। भारी पुलिस जाप्ते के साथ हुई इस बड़ी कार्रवाई से हाईवे पट्टी पर अवैध तेल और केमिकल का सिंडिकेट चलाने वाले माफियाओं में हड़कंप मच गया। प्राथमिक जांच में मौके से भारी मात्रा में संदिग्ध केमिकल और अवैध पेट्रोलियम पदार्थ बरामद होने की आशंका है। देर रात तक दोनों विभागों की टीमें सर्च ऑपरेशन में जुटी रही।

डीएसपी अंजलि सिंह और पारसोली थानाधिकारी ठाकरा राम के नेतृत्व में जब पुलिस टीम ने ढाबे के पिछले हिस्से की घेराबंदी की, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। अवैध धंधे की पुष्टि होते ही जिला रसद विभाग की टीम को मौके पर तलब किया गया। जिला रसद अधिकारी पूजा मीणा के नेतृत्व में पहुंची टीम ने देर रात तक केमिकल की प्रकृति और उसकी मात्रा का आकलन करने के लिए सैंपलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी थी।

6 साल पहले भी धमाकों से दहला था हाईवे

अक्टूबर 2020 में इसी ढाबे के पीछे बने अंडरग्राउंड गोदाम में भीषण बारूद जैसी आग लगी थी। डीजल-पेट्रोल के ड्रमों में हुए धमाकों से कोटा-चित्तौड़गढ़ हाईवे कई घंटों तक थम गया था। तब पुलिस ने इसे सील कर मुकदमा भी दर्ज किया था।

सवाल पुलिस पर: पारसोली थाने से इस मौत के गोदाम की दूरी महज तीन किलोमीटर है। जब एक बार यहां इतना बड़ा हादसा हो चुका था, तो दोबारा उसी जगह पर अवैध केमिकल का इतना बड़ा नेटवर्क कैसे खड़ा हो गया? क्या स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं थी?

ग्रामीणों का विरोध दरकिनार, बिछोर से हाईवे पर शिफ्ट किया सिंडिकेट

सूत्रों के अनुसार, मौत का यह सामान पहले बिछोर गांव के एक रिहाइशी मकान में डंप किया जाता था। ग्रामीणों के तीखे विरोध और हादसे के डर के बाद माफियाओं ने चालाकी दिखाई और सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस हाईवे वाले ढाबे को चुना। हाईवे किनारे सामने चाय-नाश्ते की दुकान दिखाई देती थी, जबकि पीछे खेत में बने भूमिगत गोदामों में कथित रूप से डीजल, पेट्रोल और खतरनाक केमिकल का अवैध री-फिलिंग और भंडारण का खेल बेखौफ चल रहा था।

मीडिया पर 'पहरा', आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार

कार्रवाई के दौरान पुलिस का रवैया भी सवालों के घेरे में रहा। पूरी मुस्तैदी दिखाने का दावा करने वाली पुलिस ने मीडियाकर्मियों को मौके पर जाने से रोक दिया, जिससे कार्रवाई को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं। रसद विभाग की अधिकारी पूजा मीणा ने बताया कि जब्त सामग्री और केमिकल के सैंपल लिए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही माल की सही मात्रा और उसकी प्रकृति का आधिकारिक खुलासा किया जाएगा।

बड़ी कार्रवाई की संभावना

प्रशासन की इस संयुक्त दबिश के बाद अब क्षेत्र में चल रहे अवैध तेल और केमिकल के पूरे रैकेट के तार खंगाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इस मामले में जल्द ही कुछ सफेदपोशों और बड़े सप्लायर्स के नामों का भी खुलासा हो सकता है।

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