चित्तौड़गढ़

Chittorgarh: तिरपाल की आड़ में चल रहा था अवैध पेट्रोल पंप, ग्रामीण बोले–साहब, यह तो ऊंट के मुंह में जीरा है

Illegal Fuel Trade: इंसानी जिंदगियों का सौदा कर चित्तौड़गढ़-कोटा हाईवे के किनारे धड़ल्ले से चलाए जा रहे अवैध ईंधन के काले साम्राज्य पर आखिरकार प्रशासन का डंडा चला है।
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Highway Fuel Smuggling
तिरपाल की आड़ में चल रहा अवैध पेट्रोल पंप, पत्रिका फोटो

Illegal Fuel Trade: इंसानी जिंदगियों का सौदा कर चित्तौड़गढ़-कोटा हाईवे के किनारे धड़ल्ले से चलाए जा रहे अवैध ईंधन के काले साम्राज्य पर आखिरकार प्रशासन का डंडा चला है। जिला विशेष टीम, पारसोली पुलिस और रसद विभाग की संयुक्त टीम ने बिछोर में छापा मारकर 1900 लीटर अवैध ज्वलनशील पदार्थ जब्त किया है। पुलिस ने आरोपी गोपाल लखारा के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और बीएनएस की धारा 287 के तहत मुकदमा तो दर्ज कर लिया है, लेकिन इस दिखावटी कार्रवाई ने पुलिस और रसद विभाग की भूमिका पर ही गंभीर सवाल दाग दिए हैं।

हाईवे पर खतरनाक खेल: मशीनों पर तिरपाल, आते ही रीफ्यूलिंग

चित्तौड़गढ़ एसपी धर्मेंद्र सिंह के निर्देश पर डीएसटी प्रभारी जोधाराम और पारसोली थानाधिकारी ठाकराराम की टीम जब मौके पर पहुंची तो नजारा चौंकाने वाला था। यहां कोई सामान्य गोदाम नहीं, बल्कि बकायदा एक अवैध पेट्रोल पंप संचालित था। वाहनों में अवैध डीजल-पेट्रोल भरने के लिए बकायदा नोजल वाली मशीनें लगी थीं। शातिर नेटवर्क का आलम यह था कि इन मशीनों को तिरपाल से छिपाकर रखा जाता था, और जैसे ही कोई वाहन आता, तिरपाल हटाकर ईंधन भर दिया जाता था।

ग्रामीण बोले, कार्रवाई की भनक लगते ही छुपाया असली जखीरा

इस कार्रवाई के बाद पुलिस भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने इस पूरे एक्शन को अधूरा और मिलीभगत का नतीजा करार दिया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पुलिस के पहुंचने से ठीक पहले ही मुख्य आरोपियों को भनक लग चुकी थी, जिससे बड़ी मात्रा में ज्वलनशील केमिकल और टैंकर रातों-रात दूसरे सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट कर दिए गए। ग्रामीणों का कहना है कि जहां सालों से हजारों-लाखों लीटर ईंधन का खेल हो रहा हो, वहां महज 1900 लीटर की जब्ती दिखाना जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।

पहले भी हो चुका है बारूद का धमाका

ग्रामीणों ने दावा किया कि कुछ साल पहले इसी परिसर में अवैध ड्रमों में विस्फोट के बाद भीषण आग लगी थी। इसके बावजूद रसद विभाग और स्थानीय पुलिस आंखें मूंदे बैठी रही, जिससे साफ है कि इस धंधे के पीछे सफेदपोशों और खाकी का बड़ा संरक्षण है। महज एक अदने से मोहरे पर केस दर्ज कर लेने से हाईवे पर मौत का यह खेल बंद नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि रसद विभाग और पुलिस अपनी साख बचाने के लिए इस अवैध रीफ्यूलिंग नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचे और उस पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करे जो जनता की जान को बारूद के ढेर पर बिठाए हुए है।

Updated on:
26 Jun 2026 08:29 am
Published on:
26 Jun 2026 08:29 am