Inspirational story: चित्तौड़गढ़। मेवाड़ की वीर धरा अब खेल के मैदान में भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। जिले का छोटा सा गांव 'पुरोहितों का सावता' आज प्रदेश भर में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुका है।
Inspirational story: चित्तौड़गढ़। मेवाड़ की वीर धरा अब खेल के मैदान में भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। जिले का छोटा सा गांव 'पुरोहितों का सावता' आज प्रदेश भर में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुका है। हैंडबॉल खेल के प्रति इस गांव के जुनून का आलम यह है कि अब लोग इसे 'खेल गांव सावता' के नाम से पुकारने लगे हैं।
गांव की इस सफलता का सबसे चमकता सितारा नीतेश अहीर हैं। राजस्थान टीम की ओर से सिल्वर मेडल जीत चुके और इंडिया के बेस्ट गोलकीपर का खिताब अपने नाम करने वाले नीतेश का चयन अंडर-17 इंटरनेशनल टूर्नामेंट के लिए भारतीय टीम में हुआ है। आगामी 20 अप्रेल को अमरीका में आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में नीतेश भारतीय चुनौती पेश करेंगे।
खिलाड़ियों को तराशने में कोच जवान सिंह और अध्यापक रतनलाल अहीर की मुख्य भूमिका रही है। उनकी देखरेख में गांव के हैंडबॉल ग्राउंड पर प्रतिदिन सुबह 2 घंटे और शाम को 3 घंटे कड़ा अभ्यास किया जाता है। शिक्षक रतनलाल बताते हैं कि गांव में अब तक दो बार राज्य स्तरीय टूर्नामेंट आयोजित हो चुके हैं। तीन बार नेशनल कैंप का सफल आयोजन हुआ है।
सात खिलाड़ी नेशनल खेलकर मेडल जीत चुके हैं। जबकि 25 बालक-बालिकाओं ने नेशनल स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। 125 से अधिक खिलाड़ी राज्य स्तर पर खेल चुके हैं।
पुरोहितों का सावता गांव में बना हैंडबॉल ग्राउंड स्थानीय प्रतिभाओं की मेहनत का गवाह है। सीमित संसाधनों के बावजूद कोच और खिलाड़ियों के अनुशासन ने इस गांव को खेलों के नक्शे पर ला खड़ा किया है। गांव के हर घर में अब हैंडबॉल के प्रति एक नई अलख जग चुकी है, जिससे आने वाले समय में और भी कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकलने की उम्मीद है।