राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में जनवरी महीने में 13 उत्सव होने हैं। दूसरी तरफ अध्यापकों के ऊपर 31 जनवरी से पहले सिलेबस पूरा कराने की जिम्मेदारी है। ऐसे में अध्यापक संगठनों ने उत्सवों को लेकर विरोध जताया है।
चित्तौड़गढ़। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में इस बार जनवरी का महीना पढ़ाई से ज्यादा 'उत्सवों' के नाम रहने वाला है। शिक्षा विभाग ने जनवरी माह के लिए उत्सवों का एक लंबा-चौड़ा कैलेंडर जारी किया है। इसमें सबसे खास आकर्षण 22 जनवरी का आयोजन होगा। पिछले साल अयोध्या में हुए रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की याद में इस वर्ष 22 जनवरी को सभी स्कूलों में 'विशेष उत्सव' मनाया जाएगा। हालांकि, परीक्षाओं के ऐन वक्त पहले आयोजनों की इस फेहरिस्त ने विवाद भी खड़ा कर दिया है।
विभाग के अनुसार, इन आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय भावना और नैतिक मूल्यों का विकास करना है। इसकी शुरुआत 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती (युवा दिवस) से होगी और समापन 30 जनवरी को शहीद दिवस के साथ होगा।
शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार जनवरी में कुल 13 कार्यक्रम होंगे। इनमें गणतंत्र दिवस 26 जनवरी का मुख्य समारोह भी शामिल है। विभाग ने सभी संस्था प्रधानों को निर्देश दिए हैं कि ये आयोजन शैक्षणिक गरिमा के साथ किए जाएं।
एक ओर विभाग इसे सांस्कृतिक विकास बता रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक संगठनों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। संगठनों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाएं सिर पर हैं। जनवरी का समय कोर्स रिविजन और प्रैक्टिकल के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। एक तरफ जर्जर भवनों से शिफ्टिंग की मारामारी है, दूसरी तरफ उत्सवों की तैयारी। ऐसे में शिक्षक पढ़ाएंगे कब। शिक्षक नेताओं का कहना है कि इतने अधिक आयोजनों से शैक्षणिक कैलेंडर पूरी तरह गड़बड़ा जाएगा और इसका सीधा असर परीक्षा परिणामों पर पड़ेगा।