चित्तौड़गढ़

मई में दुर्लभ ‘ब्लू मून’ का संयोग: मई में 2 पूर्णिमा, क्या होने वाला है बड़ा बदलाव? जानिए रहस्य

Blue Moon 2026: मई माह की शुरुआत और अंत इस बार चित्तौड़गढ़ में एक बेहद दुर्लभ खगोलीय और ज्योतिषीय संयोग के साथ होने जा रहा है। इस वर्ष मई का पहला दिन मई और आखिरी दिन 31 मां दोनों ही पूर्णिमा के रहेंगे।

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पत्रिका फाइल फोटो

Blue Moon 2026: मई माह की शुरुआत और अंत इस बार चित्तौड़गढ़ में एक बेहद दुर्लभ खगोलीय और ज्योतिषीय संयोग के साथ होने जा रहा है। इस वर्ष मई का पहला दिन मई और आखिरी दिन 31 मां दोनों ही पूर्णिमा के रहेंगे। एक ही महीने में दो पूर्णिमा के इस असाधारण संयोग को ब्लू मून कहा जाता है। ज्योतिष नजरिए से इस घटना को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है और इसे बड़े बदलावों तथा अप्रत्याशित घटनाओं का सूचक बताया है।

शहर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित अरविंद भट्ट ने इस दुर्लभ संयोग का विश्लेषण करते हुए बताया कि एक ही अंग्रेजी माह में 2 पूर्णिमा तिथियों का पड़ना ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्लू मून' का यह योग किसी ऐसी अप्रत्याशित घटना या खबर की ओर इंगित कर रहा है, जिसकी आम तौर पर उम्मीद न की गई ही और जो पूरी तरह से हैरान करने वाली हो।

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क्या है ब्लू मून का गणित

आमतौर पर हर माह में एक बार पुर्णिमा आती है, लेकिन चंद्रमा का चक्र लगभग 29.5 दिन का होता है। ऐसे में जब कोई महीना 30 या 31 दिन का होता है और पहली पूर्णिमा महीने की 1 या 2 तारीख को ही आ जाती है, तो उसी माह के अंत में दूसरी पूर्णिमा पड़ने की संभावना बन जाती है। इस दूसरी पूर्णिमा को ही 'ब्लू मून' कहा जाता है। ज्योतिष नजरिए से इस घटना को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है ।

ज्योतिषीय दृष्टि से क्यों है चिंताजनक

पंडित अरविंद भट्ट के अनुसार पूर्णिमा का सीधा संबंध मन, जल तत्व और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से होता है। एक ही माह में चंद्रमा की ऊर्जा का दो बार चरम पर होना प्राकृतिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टियों से उथल-पुथल का कारण बन सकता है। यह योग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी अचानक घटने वाले घटनाक्रम का संकेत दे रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार इस दौरान महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सावधानी बरतनी चाहिए। आमजन को भी इस अवधि के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। ज्योतिष नजरिए से इस घटना को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है और इसे बड़े बदलावों तथा अप्रत्याशित घटनाओं का सूचक बताया है।

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