Chittorgarh News: पति के निधन के कुछ ही समय बाद पत्नी रानी बाई जाट ने भी अपने प्राण त्याग दिए। दोनों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया।
Chittorgarh News: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के कांकरवा क्षेत्र के बावरियों का खेड़ा गांव में प्रेम, समर्पण और साथ निभाने की एक ऐसी मार्मिक मिसाल सामने आई, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। 85-90 वर्ष के बुजुर्ग दंपती हरिराम जाट और उनकी पत्नी रानी बाई जाट ने जीवनभर साथ निभाने के अपने वादे को निभाया।
हरिराम जाट लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका इलाज उदयपुर के एक अस्पताल में जारी था। इलाज के दौरान ही उन्होंने अंतिम सांस ली। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए पैतृक गांव बावरियों का खेड़ा लाया गया। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों और परिजनों की आंखें नम हो गईं, क्योंकि हरिराम जाट गांव के मिलनसार व्यक्तियों में से एक थे।
इसी बीच एक और भावुक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया। पति के निधन के कुछ ही समय बाद उनकी बीमार पत्नी रानी बाई जाट ने भी अपने प्राण त्याग दिए। ग्रामीणों का कहना है कि यह उनके अटूट प्रेम और आत्मिक जुड़ाव का ही परिणाम था कि पति के बिछड़ने का दुख वे सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने भी दुनिया को अलविदा कह दिया।
गांव में इस घटना के बाद माहौल बेहद गमगीन हो गया, लेकिन साथ ही लोगों के दिलों में इस दंपती के प्रेम और समर्पण के प्रति सम्मान भी उमड़ पड़ा। ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि इस जोड़े को अंतिम विदाई भी एक साथ ही दी जाएगी।
पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ दोनों की अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। बैंड-बाजे के साथ निकाली इस अंतिम यात्रा में हर कोई भावुक नजर आया।
श्मशान घाट पर भी इस जोड़े को अलग नहीं किया गया। दोनों के पार्थिव शरीरों का एक ही चिता पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
लोग इस अनोखे प्रेम को देखकर भावुक हो उठे और इस दंपती को अंतिम विदाई देते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। हरिराम जाट और रानी बाई जाट के एक निधन की खबर पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है।