
चूरू.
भारतीय जनता पार्टी हाई कमान ने रविवार देर रात दिल्ली पार्टी कार्यालय से विधानसभा चुनाव 2018 के लिए 131 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। लेकिन इस सूची में चूरू के दो ही नाम शामिल किए गए हैं। चूरू से मंत्री राजेन्द्र राठौड़ व सादुलपुर से पूर्व सांसद रामङ्क्षसह कस्वां का नाम शामिल है। वहीं लिस्ट जारी होते ही दोनों उम्मीदवारों के समर्थकों ने मिठाई खिलाकार व आतिशबाजी कर जश्न मनाया। फोन पर एक दूसरे को बधाइयां दी। वहीं रतनगढ़ से राजकुमार रिणवा, तारानगर से जयनारायण पूनिया, सुजानगढ़ से खेमाराम मेघवाल, सरदारशहर से अशोक पींचा की धड़कने बढ़ गई हैं। लिस्ट में नाम नहीं आने से उक्त चारों संभावित उम्मीदवारों को बड़ा झटका लगा है। राठौड़ ने कहा कि 17 नवंबर को वे समर्थकों के साथ भाजपा पार्टी से नामांकन दाखिल करेंगे।
जानिए मंत्री राजेन्द्र राठौड़ का राजनीतिक संघर्ष
सरदारशहर तहसील के गांव हरपालसर स्थित स्वर्गीय उत्तमसिंह राठौड़ के घर 21 अप्रेल 1955 में राजेन्द्र का जन्म हुआ। पिता उत्तमसिंह आरएएस अधिकारी थे। हनुमानगढ़ में अधिक समय तक नौकरी करने के कारण वहां भी निवास बनाकर रहने लगे। राठौड़ की शिक्षा हनुमानगढ़ से शुरू हुई और जयपुर में राजस्थान विश्वविद्यालय से पूरी हुई। हालांकि राठौड़ का मूलस्थान चूरू के दांदू गांव में है।
राठौड़ की शिक्षा
राठौड़ ने हनुमानगढ़ में पहली से लेकर १२वीं व बीएससी की पढ़ाई की। बीएससी प्रथम श्रेणी पास हुए। स्नातकोत्तर शिक्षा जयपुर विश्वविद्यालय से की। यहीं से राजनीति विज्ञान से एमए की शिक्षा ली और एलएलबी की, बाद में श्रम कानून में डिम्लोमा भी किया।
1990 के बाद नहीं रुका राठौड़ का विजय रथ
मंत्री राठौड़ ने बताया कि राजनीति में उन्हे लाने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर को है। उनकी पदयात्रा में वे काफी दिन तक साथ रहे। इसकी वजह से उन्होंने राजनीति की मुख्यधारा में लाने के लिए मार्ग प्रशस्त किया। 1985 में चूरू से जनता पार्टी की टिकट पर विधानसभा का पहला चुनाव लड़े लेकिन कांग्रेस की हमीदा बेगम से हार गए। दूसरा चुनाव 1990 में जनता दल से लड़े और जीत गए। यहीं से उनकी जीत का सिलसिला शुरू हुआ जो आज तक जारी है।
जानिए राठौड़ का राजनीतिक सफर
- 1978-79 में राजस्थान विश्वविद्यालय सीनेट सदस्य
- 1979-80 में राजस्थान विश्वविद्यालय में अध्यक्ष
- 1980-81 में मास्को में आयोजित युवा सम्मेलन में राजस्थान का प्रतिनिधित्व
- 1982 से 84 तक युवा जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष
- 1990-91 में जनता दल में प्रदेश मंत्री
- 1991-93 तक भारतीय जनता पार्टी में प्रदेश मंत्री
- 2003-04 तक भारतीय जनता पार्टी में प्रदेश उपाध्यक्ष रहे
- 1990 से 2008 तक चूरू विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे
- 2008 से 2013 तक तारानगर क्षेत्र से विधायक रहे
- 2013 में फिर चूरू से विधायक चुने गए
इन प्रमुख पदों पर रहे राठौड़
- 1990-91 तक राजस्थान विधानसभा में गृह समिति के सदस्य
- फरवरी 1991 से दिसंबर 1993 तक विधानसभा में सरकारी उप मुख्य सचेतक
- दिसंबर 1993 से नवंबर 1998 तक राजस्थान सरकार में चिकित्सा एवं स्वस्थ्य विभाग के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार
- 1999 से 2000 तक सरकार में गृह समिति में सदस्य
- 2001- से 03 तक सरकार की जनलेखा समिति में सदस्य
- 1998 से 03 व 2008-13 तक विधायक दल के मुख्य सचेतक
- 2004 में 30 मई तक राजकीय उपक्रम समिति के सभापति व 2009 से 13 तक सदस्य रहे
- 2014-15 में व्यापार सलाहकार समिति में सदस्य
- मई 2004 से 10 दिसंबर 2008 तक सानिवि व संसदीय मंत्री रहे
- दिसंबर 2013 से आठ दिसंबर 2016 तक चिकित्सा, विधि व संसदीय व वक्फ बोर्ड के मंत्री
- 09 दिसंबर 2016 से पंचायत राज, संसदीय एवं निर्वाचन मंत्री
73 वर्षीय रामसिंह पर भाजपा ने फिर खेला दांव
वहीं सादुलपुर में पार्टी ने एक बार फिर पूर्व सांसद रामसिंह कस्वां पर दांव खेला है। रामसिंह दूसरी बार विधायक का चुनाव लड़ेंगे। रामङ्क्षसह को करीब 40 साल का राजनीतिक अनुभव है। 1991 में पहली बार सांसद बने। 1998 में सादुलपुर से विधायक चुने गए। फिर 1999 में विधायक से स्तीफा देकर सांसद का चुनाव लड़ा और जीते। भाजपा के जिलाध्यक्ष पद पर रहे। 2004 में फिर सांसद चुने गए। 2009 में चौथी बार सांसद बने। रामसिंह कस्वां लगातार 13 साल सरपंच भी रह चुके हैं। इनके पिता दीपचंद कस्वां सादुलपुर से विधायक रह चुके हैं। अब तक बगावत नहीं की। भाजपा में ही शुरू से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी माने जाते हैं।