चूरू. छापर. ग्राम चाड़वास में शनिवार सुबह स्कूल जा रहे एक नौ वर्षीय बच्चे को पीछे से आई बस ने कुचल दिया, इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। गुस्साए ग्रामीण व परिजनों ने मुआवजे व चालक पर कार्यवाही की मांग को लेकर सड़क पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। इस कारण सड़क के दोनों ओर गाडिय़ों की कतार लग गई।
चाड़वास गांव का मामला
परिजनों ने बस चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर किया प्रदर्शन
चूरू. छापर. ग्राम चाड़वास में शनिवार सुबह स्कूल जा रहे एक नौ वर्षीय बच्चे को पीछे से आई बस ने कुचल दिया, इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। गुस्साए ग्रामीण व परिजनों ने मुआवजे व चालक पर कार्यवाही की मांग को लेकर सड़क पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। इस कारण सड़क के दोनों ओर गाडिय़ों की कतार लग गई। जानकारी अनुसार गोङ्क्षवद नायक पुत्र ओमप्रकाश नायक निवासी चाड़वास सुबह साढ़े नौ बजे स्कूल के लिए जा रहा था। इधर छापर की ओर से आ रही बस ने चाड़वास बस स्टैंड के पास बच्चे को कुचल दिया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की सूचना पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित हो गई। मौके पर पहुंचे राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष सीताराम नायक व तहसील अध्यक्ष रतनलाल नायक ने ग्रामीणों के साथ सड़क पर पड़े शव के पास बैठकर पीडि़त परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने व सड़क पर गतिअवरोधक बनवाने की मांग की। लगभग तीन घण्टे के लंबे अंतराल के बाद प्रशासन के बीदासर तहसीलदार द्वारका प्रसाद, डीएसपी प्रहलाद राय, छापर थानाधिकारी सुमन परिहार व सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता आसाराम ने समझाइस कर मृतक के परिवार जनों को मुवावजा राशि दिलाने का आश्वासन दिया।
इस सहमति पर शव का राजकीय चिकित्सालय छापर में पोस्टमार्टम करवाया गया। परिवादी मनोज पुत्र मंगलाराम जाती नायक निवासी चाड़वास ने थाने में रिपोर्ट देते हुए बताया कि सुजानगढ से बीकानेर जाने वाली बस के चालक जयङ्क्षसह राजपूत निवासी गोपालपुरा ने लापरवाही व गफलत से गाड़ी चला कर टक्कर मार दी। ईस दौरान चाड़वास के रामदेव गोदारा, पुटिया राजा, भंवरलाल दूत, गिरधारी महला, राजस्व विभाग के कन्हैयालाल स्वामी आदि मौके पर मौजूद थे। मृतक गोङ्क्षवद परिवार में एक बहन व दो भाइयों के साथ सबसे छोटा था। मृतक के पिता ओमप्रकाश गांव में मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करता है।
एक दिन पहले जन्में नवजात को पालना गृह में छोड़ा
छोडऩे से पहले प्रशिक्षित हाथों से कराया जन्म
चूरू. राजकीय भरतिया अस्पताल के पालना गृह में कोई एक दिन पहले जन्मे नवजात को शुक्रवार मध्यरात्रि बाद करीब एक बजे छोडकर चले गए। अच्छी बात यह है कि नवजात को झाडी या कचरे के ढेर पर मरने के लिये नहीं फैंका जाकर पालना गृह में छोडा गया। पालने में मिले नवजात बालक की सांस में काफी दिक्कत थी, जिसके बाद बच्चे को एसएनसीयू वार्ड में लाया गया। हालत बिगडने पर उसे नीकू वार्ड में लाया गया, जहां उसे सी-पेप के जरिए आक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। अस्पातकर्मियों ने बताया कि शुक्रवार मध्यरात्रि बाद करीब रात 1.50 मिनिट पर घंटी की आवाज सुनकर दौड़कर पालना गृह पहुंचे। जहां बेबी किट व शॉल में बच्चा लिपटा हुआ था। नवजात का वजन एक किलो 600 ग्राम है, प्री मैच्योर डिलीवरी है। नवजात का जन्म करीब 24 घंटे पहले किसी अस्पताल में प्रशिक्षित के हाथों से होना बताया जा रहा है। क्योंकि उसके कोड क्लिप लगी हुई है। नवजात को फिलहाल आक्सीजन स्पोर्ट पर रखा गया है। नीकू वार्ड में उसका इलाज जारी है। गौरतलब है कि प्रदेश में नवजात पैदाईशों को लोग मरने के लिए झाडिय़ों, गंद नालों व कचरे के डिब्बे में फेंक जाते थे, जहां पर कभी श्वान उन्हें नौंचकर खा जाते थे। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए पालना गृह बनाए गए थे। यहां नवजात को सुरक्षित रखने वाले से पुलिस या अन्य कोई पूछताछ नहीं कर सकता व मुकदमा भी दर्ज नहीं किया जाता, पालना गृह का उद्देश्य नवजातों को बचाना है।