
चूरू. खेतों तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं होने की समस्या से अब खेतीहरों को सामना नहीं करने पड़ेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने खातेदारी भूमि तक पहुंच मार्ग उपलब्ध करवाने के लिए सरकारी जमीन से एक पट्टी आवंटन करने की पहल की है।
जानकारी के अनुसार राजस्व अभिलेखों में दर्ज सड़क, रास्ता अथवा अन्य सार्वजनिक मार्ग और खातेदारी भूमि के मध्य संर्कीण सरकारी जमीन की पट्टी अवस्थित होने के कारण संबंधित खातेदार को अपनी खातेदारी भूमि तक पहुंच नहीं होने प्रकरण राज्य सरकार के संज्ञान में आए है। जिस पर सरकार ने खेतों तक जाने के लिए रास्ता दिए जाने की पहल कर रही है।
बजट घोषणा का क्रियान्वयन
राज्य सरकार की घोषणा के क्रियान्वयन में अब ऐसे प्रकरणों में 20 फीट तक की चौड़ाई की राजकीय भू-पट्टी का कृषि भूमि की प्रचलित डीएलसी (DLC) की दो गुनी दर से भुगतान करने पर संबधित खातेदार को पहुंच मार्ग के लिए आवंटन किये जाने की तैयारी की है। जिसके क्रम में तय शर्तों एवं प्रक्रिया के अनुसार आवंटन किया जाएगा। इसी संदर्भ में राजस्व विभाग (Revenue Department) के शासन उप सचिव हरिसिंह मीना ने राज्य के सभी जिला कलक्टर्स के नाम परिपत्र जारी कहा गया है कि यह सुविधा केवल उन प्रकरणों में देय होगी जहां संबंधित खातेदारी भूमि का किसी राजकीय सड़क, रास्ते अथवा सार्वजनिक मार्ग से प्रत्यक्ष संपर्क उपलब्ध न हो और खातेदारी भूमि एवं राजस्व अभिलेखों में दर्ज सड़क, रास्ते के मध्य राजकीय भूमि की संकीर्ण पट्टी अवस्थित होने और वैकल्पिक पहुंच मार्ग उपलब्ध नहीं हो।
अधिकतम चौड़ाई 20 फीट
शासन उप सचिव के परिपत्र अनुसार राजकीय भूमि (Government Land) की पट्टी की अधिकतम चौड़ाई 20 फीट तक सीमित रहेगी। आवंटन केवल पहुंच मार्ग के प्रयोजन के लिए किया जाएगा। कहा यह भी गया है कि आवंटित भूमि का उपयोग किसी निर्माण, व्यवसायिक गतिविधि, विक्रय, उपविभाजन अथवा अन्य किसी प्रयोजन के लिए नहीं किया जाएगा।
कलक्टर के माध्यम से प्रस्ताव
आदेश अनुसार आवंटन के लिए प्रस्ताव जिला कलक्टर के माध्यम से राज्य सरकार को प्रेषित किए जाएंगे। कलक्टर की ओर से ऐसी भूमि के आवंटन के प्रस्ताव स्वयं की अनुशंसा मय राजस्व नक्शा, जमाबंदी, खसरा गिरदावरी एवं मौका रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी। आवंटन के लिए प्रस्तावित भूमि का आवंटन जिला स्तरीय समिति की ओर से अनुमोदित कृषि भूमि की दर से दो गुना मूल्य वसूल कर किया जायेगा और यह रास्ता सार्वजनिक दर्ज किया जायेगा।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का इसके पीछे उद्देश्य यह है कि यदि किसी किसान या खातेदार की जमीन तक सीधे सड़क या सार्वजनिक रास्ते से पहुंच नहीं है और बीच में थोड़ी सी सरकारी जमीन आ रही है तो सरकारी भूमि की अधिकतम 20 फीट चौड़ी पट्टी आवंटित की जा सकेंगी। जिससे खेत तक रास्ता बनाया जा सकें।
इनका कहना है
- भारतीय किसान संघ ने खेतों को रास्ता देने के लिए आंदोलन कर रही है लेकिन सरकार की ओर से जारी आदेश व्यावहारिक नहीं है। सरकारी भूमि में रास्ता यदि क्या किसान खरीद सकता है। जबकि यदि खेत के निकट सरकारी जमीन आती है तो वहां तो निशुल्क मार्ग उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। किसान के खेत से अगले खेतों में जाने का मार्ग देना है तो सरकार को मार्ग के बदले जमीन का मुआवजा मिले। यह प्रावधान भी है। मुकेश रामपुरा, जिला अध्यक्ष भारतीय किसान संघ चूरू
- संगठन ने खेतों में रास्ता देने की मांग की और सरकार ने कम से कम इस पर संज्ञान तो लिया। हालांकि सरकारी जमीन खरीदकर रास्ता दिए जाने की शर्त कत्तईव्यावहारिक नहीं है। केवल सरकारी जमीन से नहीं बल्कि जिन भी खेतों में जाने के लिए मार्ग उपलब्ध नहीं है वहां रास्ते देने होंगे। सरकार ने एक पहल की संगठन बनाई गई नीति पर सरकार से बात करेंगी। श्रीचंद सिद्ध, प्रांत मंत्री, भारतीय किसान संघ
Published on:
08 May 2026 12:34 pm
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