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Wild Life Census : रेत के रण में चिंकारा आबाद, गिद्धों की उड़ान हुई गुम

आंकलन में मांसाहारी, शाकाहारी, पक्षी एवं सरीसृपों की विभिन्न प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जो जंगल की संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत देती है।

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नरेंद्र शर्मा

चूरू. कटते जंगल, सिकुड़ती जमीन से जुझ रहे मरुस्थलीय जिले के लिए अच्छी खबर है यह कि पर्यावरण को संतुलित बनाने रखनेवाले वन्य जीव यहां विचरण करते नजर आ रहे हैं। अभी वैशाख पूर्णिमा पर हुई वन्य जीव गणना (Wild Life Census) में चिंकारा की संख्या मं वृद्धि हुई है। वहीं, शर्मिला लेकिन ताकतवर नील गाय जिसे रोजड़ा कहा जाता है का परिवार बढ़ा है।

बीत रहे दशक में चूरू जिले (Churu District) के वन क्षेत्रों में रहनेवाले जीवों की सुरक्षा एक चुनौती बन गई थी जिस पर जिले का वन विभाग सक्रिय हुआ और कोविड के बाद लगातार तीसरी बार हुई वन्य जीव गणना के सुखद परिणाम भी निकले। हालांकि, लुप्त हुआ पक्षी राज गिद्ध पिछले साल कुछ जगह पर दिखाई दिया, लेकिन इस वन्य जीव गणना में फिर वह लुप्त रहा।

पर्यावरण संरक्षण में सहायक रहा गिद्ध स्वयं प्रदूषित पर्यावरण की भेंट चढ़ गया, फिर उप वन संरक्षक कार्यालय, चूरू की माने तो वर्ष 2026 में किए गए वन्यजीव आंकलन में ताल छापर अभयारण्य (Tal Chhapar Sanctuary) सहित जिले के वन क्षेत्रों की समृद्ध जैव विविधता सामने आई है। आंकलन में मांसाहारी, शाकाहारी, पक्षी एवं सरीसृपों की विभिन्न प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जो जंगल की संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत देती है। मांसाहारी में जंगली और मरु बिल्लियां भोजन के लिए घात लगाती नजर आईं, तो लोमड़ी (Fox) और भेडि़या (Wolf) का अस्तित्व भी बचता नजर आया है।

सबसे ज्यादा नील गाय राजगढ़ में

जिले में एक ऐसा ताकतवर वन्य जीव नील गाय जिसे रोजड़ा भी कहा जाता है का परिवार बढ़ा है। जिले में इसकी संख्या करीब 2530 हो गई है, जिसके क्रम में रतनगढ़ 312, राजगढ़ 689, सुजानगढ़ 328, चूरू 541, तारानगर 311 तथा सरदारशहर के बीहड़ में 358 रोज है।

चिंकारा करते है धोरों की धरती पर उछल कूद

चिंकारा (Chinkara) एक छोटा मृग, जो अब जिले की मरुभूमि में खूब उछल करते नजर आने लगे हैं। आम-बोल चाल की भाषा में हिरणियां कहते हैं और यह वन क्षेत्र को रमणीक आभा प्रदान करता है। इनका परिवार खूब पढ़ा है। जिले में करीब 3395 चिंकारा हैं। जिले के रतनगढ़ में 297, राजगढ़ में 840, सुजानगढ़ में 680, चूरू में 461, तारानगर में 590 तथा सरदारशहर में 527 चिंकारा हैं।

मरु लोमड़ी और जंगली बिल्ली

जिले के वन क्षेत्रों में जंगली और मरु बिल्ली, जंगली और मरु लोमड़ी के निवास का होना एक सुखद संयोग है। कुछ वर्षों पहले इसकी संख्या घट रही थी, लेकिन अब इनका परिवार बढ़ रहा है। इसके अलावा सियार और गीदड़ भी दिखाई दिए है। हालांकि ये कुछ ही वन क्षेत्रों में है जिनमें अभी किए गए आकलन में सुजानगढ में 8 और तारानगर में 7 सियार, गीदड़ दिखाई दिए इसलिए जिले में इनकी कुल संख्या 15 गिनती में आई है। जंगली बिल्ली जिलेभर में दिखाई दी है तो मरु बिल्ली सुजानगढ़ में 45, सरदारशहर में 43 और एक तारानगर में नजर आई है। चालाक कही जानेवाली जंगली लोमड़ी का परिवार फल फूल रहा है। रतनगढ में 41, राजगढ़ में 43, सुजानगढ़ में 64, चूरू में 61, और सरदारशहर में 43 लोमडि़यां रह रही हैं।

वन क्षेत्राें में नजर आए काले हरिण

यूं तो काले हरिणाें का सबसे बड़ा परिवार ताल छापर अभयारण्य में है, लेकिन अब जिले के कुछ क्षेत्रों में काले हरिण दिखाई दिए है जिसके क्रम में राजगढ़ में 48 और सुजानगढ़ में 28 कृष्ण मृग हैं।

दिखाई दिया भेडि़या

वरिष्ठ जनों के अनुसार कभी यहां के वन क्षेत्रों में भेडि़यों की संख्या ठीक ठाक थी लेकिन इसके बाद धीरे धीरे यह लुप्त होता गया। पिछले साल भी भेडि़या दिखाई दिया और इस बार भी आकलन के दौरान दो भडि़ये दिखाई दिए। इसकी संख्या बढ़े इसलिए वन विभाग की इसके प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।

वर्ष 2026 में वन्यजीवों के आंकलन में पाई संख्या

सियार/गीदड : 15

जंगली बिल्ली : 252

मरू बिल्ली : 84

जंगली लोमडी : 261

मरू लोमड़ी : 340

भेड़या : 2

बिज्जू छोटा : 4

हर्बीवोर

काला हरिण : राजगढ़- 48, सुजानगढ़ 29 - 76

नील गाय रोज - 2530

चिंकारा - 3395

जंगली सुअर - 32

पक्षी

बर्डस ऑफ प्रे - 230

साण्डा- 1718

नेवला- 178

खरगोश - 266

इनका कहना है

वन क्षेत्रों में वैशाख पूर्णिमा पर 24 घंटे रेंजवार वनकर्मी वाटर पाइंट पर तैनात रहे और रेंजरों की निगरानी रही। वन्य जीवों के कुनबे का बढ़ना सुखद रहा, इस दौरान मौसम ठीक रहा और चांद की रोशनी में वाटर पाइंट पर आए वन्य जीवों के अनुसार एक आकलन किया गया। भवानीसिंह, उप वन संरक्षक चूरू