तारानगर एसडीएम राजेंद्र कुमार ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन सवाल यही है-क्या कार्रवाई समय रहते होगी या किसी बड़े हादसे के बाद?
साहवा. कस्बे के नगरपालिका क्षेत्र में कानून को ठेंगा दिखाते हुए स्टेट हाईवे-36 पर अवैध कब्जा कर बनाया गया रॉयल्टी वसूली नाका अब लोगों की जान के लिए खतरा बनता जा रहा है। पीओपी फैक्ट्रियों के बीच तारानगर रोड पर सड़क सीमा में खड़े इस झोंपड़े से दिन-रात जिप्सम से भरे वाहनों से वसूली की जा रही है, जिससे न केवल यातायात बाधित हो रहा है बल्कि बड़े हादसे का खतरा भी मंडरा रहा है।
निर्धारित जगह छोड़, मनमर्जी से नाका संचालित
हैरानी की बात यह है कि रॉयल्टी वसूली के लिए तय स्थान नोहर-भादरा तिराहा है, लेकिन ठेकेदार ने बिना अनुमति के सड़क किनारे कब्जा कर साहवा-तारानगर मार्ग पर अपनी सुविधा से नाका खड़ा कर लिया। विभाग को जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
हाईवे पर रुकते वाहन, बढ़ रहा खतरा
इस अवैध नाके पर हर समय 5-6 कर्मचारी तैनात रहते हैं, जो गुजरते वाहनों को रोककर वसूली करते हैं। इससे हाईवे पर जाम जैसे हालात बनते हैं और आम वाहन चालकों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
पहले भी हो चुका हादसा, फिर भी बेपरवाही
हाल ही में पास ही एक कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई थी, जिसमें दो लोग गंभीर घायल हुए। ऐसे में यदि कोई वाहन इस अवैध झोंपड़े से टकराता है, तो बड़ी जनहानि से इंकार नहीं किया जा सकता।
लोगों का गुस्सा, प्रशासन पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क सीमा में बढ़ते अतिक्रमण भविष्य के बड़े खतरे का संकेत हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर मामले को टाल रहे हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
हाई कोर्ट भी सख्त, फिर भी अनदेखी
राजस्थान हाई कोर्ट, जोधपुर (Rajasthan High Court) पहले ही ऐसे अवैध रॉयल्टी नाकों को सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हुए इन्हें हटाने के निर्देश दे चुका है। इसके बावजूद साहवा में खुलेआम यह नाका चलना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।
जांच का आश्वासन
तारानगर एसडीएम राजेंद्र कुमार ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन सवाल यही है-क्या कार्रवाई समय रहते होगी या किसी बड़े हादसे के बाद?