चूरू

Farmers News: चूरू में बढ़ती गर्मी से गेहूं की फसल पर संकट, कृषि विशेषज्ञों ने दी ये खास सलाह

चूरू के सादुलपुर क्षेत्र में बदलते मौसम ने गेहूं की फसल के लिए चिंता बढ़ा दी है। वर्तमान में फसल बालियां निकलने और दाना बनने की अवस्था में है, ऐसे में गर्मी के कारण उत्पादन घटने का डर है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखें।

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Feb 14, 2026
पत्रिका फोटो

Churu News: सादुलपुर गत एक सप्ताह से लगभग मौसम में हुए परिवर्तन से सर्दी का असर कम होने और दिन में तेज धूप का प्रभाव बढ़ने लगा है। जहां लोगों को सर्दी से राहत मिली है वहीं मौसम परिवर्तन का सीधा असर रबी की मुख्य फसल गेहूं पर पड़ रहा है। तहसील के सिंचित ग्रामीण क्षेत्र में इन दिनों गेहूं की फसल परवान पर है।

ग्रामीण किसानों का कहना है कि वर्तमान समय में गेहूं की फसल बालियां निकलने तथा दाना बनने की अवस्था में है। तेज धूप और तापमान में अचानक वृद्धि के कारण फसल पर विपरीत असर देखने को मिल सकता है। ऐसे में खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि दाने का भराव अच्छा हो सके और उत्पादन प्रभावित न हो।

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किसानों ने बताया कि प्रतिदिन खेत का निरीक्षण कर आवश्यकता अनुसार सिंचाई करनी चाहिए, विशेषकर हल्की भूमि वाले क्षेत्रों में अधिक सावधानी की जरूरत है।

गेहूं में संभावित रोग और बचाव

किसान नरेंद्र सिंह मेहरा, महेंद्र सिंह, सीताराम, चंद्रभान ने बताया कि मौसम परिवर्तन के साथ गेहूं की फसल में विभिन्न प्रकार के रोगों की आशंका भी बढ़ जाती है। पीला रतुआ (येलो रस्ट) पत्तियों पर पीली धारियां या धब्बे दिखाई देते हैं, जिससे पौधे की वृद्धि प्रभावित होती है। कई किसान फसल पर फफूंदनाशक का छिड़काव करने की तैयारी में जुटे है।

कंडुआ एवं करनाल बंट रोग

किसानों ने बताया कि बालियों में दाने काले पड़ने लगते हैं और गुणवत्ता प्रभावित होती है। प्रमाणित बीज का प्रयोग तथा संतुलित उर्वरक उपयोग से इस रोग से बचाव संभव है।पत्तियों के सिरे सूखने लगते हैं और पौधा कमजोर पड़ जाता है। समय पर सिंचाई एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का स्प्रे लाभकारी रहता है।

खाद एवं पोषण प्रबंधन

किसानों के अनुसार इस समय आवश्यकता अनुसार यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करनी चाहिए। साथ ही जिंक, सल्फर एवं अन्य सूक्ष्म तत्वों का छिड़काव करने से पौधे स्वस्थ रहते हैं और दाने का भराव बेहतर होता है। अधिक नाइट्रोजन देने से फसल गिरने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए संतुलित मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

तेज धूप और तापमान में वृद्धि को देखते हुए खेत में नमी बनाए रखना आवश्यक है। विशेषकर दाना बनने की अवस्था में पानी की कमी से उत्पादन में गिरावट आ सकती है। सुबह या शाम के समय सिंचाई करें, ताकि पानी का वाष्पीकरण कम हो और फसल को पर्याप्त लाभ मिल सके।

ग्रामीण किसानों ने विश्वास जताया कि यदि समय पर सिंचाई, संतुलित खाद प्रबंधन और रोग नियंत्रण के उपाय अपनाए जाएं तो इस वर्ष गेहूं की पैदावार अच्छी रहने की संभावना है।

मौसम में आए बदलाव के बीच किसानों की सजगता ही बेहतर उत्पादन की कुंजी साबित होगी और यदि इसी प्रकार समय पर सिंचाई, संतुलित खाद एवं रोग नियंत्रण किया गया तो इस वर्ष क्षेत्र के सिंचित गांवों में गेहूं की अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है।

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Published on:
14 Feb 2026 04:07 pm
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