
चूरू. एलौपेथी को बढ़ावा देने के लिए एक तरफ जहां लगातार मेडिकल कॉलेज व अस्पताल खोले जा रहे हैं। दूसरी तरफ आयुर्वेद औषधालय उपेक्षा का शिकार है। जबकि देश की पुरानी पद्धति आयुर्वेद में कई बीमारियों के शर्तिया इलाज है। ऐसा ही कुछ मामला जिला मुख्यालय स्थित प्रतिभा नगर में तैयार ५० बैड वाले आयुर्वेद अस्पताल का है। भवन का निर्माण करीब छह माह पूर्व पूरा हो चुका है। अब केवल बिजली कनेक्शन के कारण औषधालय शुरू नहीं हो पा रहा है। जबकि विभाग की ओर से लगभग सभी औपरिकताएं पूरी कर ली गई है।
सरकार की ओर से भी इसे शुरू करवाने में कोई खासी रुचि नहीं दिखा रही है। जानकारी के मुताबिक तत्कालीन भाजपा सरकार की ओर से प्रदेश में चार औषधालय शुरू किए गए थे। इसमें चूरू सहित भीलवाड़ा, बीकानेर व अजमेर शामिल थे। निर्माण के लिए करीब साढ़े नौ करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया। जिसमें से करीब सवा दो करोड़ के उपकरण खरीदे जाने थे। औषधालय के निर्माण से मरीजों को राहत मिलती। इसमें मरीजों के लिए अलग से ओपीड़ी, पंचकर्म, योगा आदि की सुविधा मिलेगी। तीन मंजिल का यह पूरा भवन वातानुकूलित होगा।डॉक्टर्स के बैठने के लिए अलग-अलग चैम्बर बनाए गए हैं।
विशेषज्ञों की मांगी सूची
सूत्रों की माने तो पांच मजिला भवन में अलग-अलग मंजिलों पर भर्ती सहित अन्य कक्ष बनाए गए हैं। मरीजों को लाने-ले जाने के लिए लिफ्ट लगाई गई है। लेकिन इसका काम भी अधूरा है। साथ ही आयुर्वेद भवन के लिए अभी तक विशेषज्ञ आयुर्वेद चिकित्सकों की नियुक्ति का रास्ता भी साफ नहीं हो पाया है। विभाग की ओर से अभी तक आयुर्वेद चिकित्सकों के नाम मांगे जा रहे हैं। इसके अलावा कई निर्माण अभी तक अधूरे पड़े हुए हैं। लेकिन अधिकारियों की माने तो बिजली का कनेक्शन होने पर इसे शुरू किया जा सकता है।
इनका कहना है
भवन का निर्माण पूरा हो चुका है, बिजली का कनेक्शन नहीं होने से शुरू करने में अड़चन आ रही है। कुछ और भी कमियां अभी है, इसके शुरू होने से आमजन को काफी राहत मिलेगी।
अनिल मिश्रा, जिला आयुर्वेद अधिकारी, चूरू