नीति अनुसार बच्चों के माता-पिता विकास योजना और लगने वाला बजट तय करेंगे। राजकीय विद्यालय अब होंगे सामुदायिक संपत्ति-स्कूल प्रबंधन समिति के नए स्वरूप में अब प्रबंधन सीधे अभिभावकों के हाथों में होगा।
चूरू. केंद्र सरकार ने राजकीय विद्यालयों की व्यवस्थाओं में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए मई 2026 से लागू किए गए दिशा-निर्देशाें के अनुरूप लिए गए निर्णय अनुसार अब राजकीय विद्यालयों की विकास योजना अभिभावक तय करेंगे।अभी हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Union Education Minister Dharmendra Pradhan) ने 6 मई को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन (Vigyan Bhawan New Delhi) में स्कूल प्रबंधन समिति के नये दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि इससे सामुदायिक सहभागिता एवं शिक्षा के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ विद्यालय प्रशासन को भी पारदर्शी व मजबूत करेगें।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति विजन
राष्ट्रीय शिक्षा नीति मिशन (National Education Policy Mission) में कार्यान्वित की अहम भूमिका को प्रतिपादित करते हुए बताया गया है कि एसएमसी दिशानिर्देश 2026 एनईपी के विजन में अभिभावक, शिक्षक, विद्यार्थी और समुदाय में परस्पर निकटता बनाते हुए समुदाय के साथ मिलकर विद्यार्थी के समग्र विकास की थीम रखी गयी है। इन्ही उद्देश्यों की शत- प्रतिशत प्राप्ति के लिए नये दिशानिर्देश लागू किए हैं जिन्हें केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में भी लागू किया जायेगा।
अभिभावक तय करेंगे विकास योजना
नीति अनुसार बच्चों के माता-पिता विकास योजना और लगने वाला बजट तय करेंगे। राजकीय विद्यालय अब होंगे सामुदायिक संपत्ति-स्कूल प्रबंधन समिति के नए स्वरूप में अब प्रबंधन सीधे अभिभावकों के हाथों में होगा। इस ऐतिहासिक बदलाव के कारण अब समिति को 30 लाख रुपए तक निर्माण कार्य बिना पीडब्ल्यूडी के हस्तक्षेप से स्वयं कराने की वित्तीय शक्तियां मिल सकेगी।अब विद्यालय मात्र सरकारी संस्थान ही नहीं बल्कि सामुदायिक संपत्ति के रूप में विकसित किए जाएंगे। इसके तहत चैक बुक पावर बढेगा व सचिव व अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षरों से भुगतान होगा।
होगा सामाजिक स्तर पर सत्यापन
नये दिशा-निर्देशों में व्यवस्था मैं पारदर्शिता के लिए सरकारी आडिट के साथ सोशल आडिट भी सिस्टम का हिस्सा बन जायेगी जिससे कार्यों की गति बढने के अलावा भ्रष्टाचार की संभावना न्यून हो जायेगी। समिति की बैठकों के इतर नोटिस बोर्ड पर भी सालाना आय-व्यय का हिसाब चस्पा करना होगा।
जीरो टालरेंस नीति
किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता और अन्य व्यवस्था संबंधित खामियों पर पुलिस, स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग मिल कर कार्य करेगें। अब वित्तीय अनियमित्ता की स्थिति में सीधे कार्रवाई की जा सकेगी।
आगामी तीन वर्षों की विकास योजना इसी साल बनेगी
नये प्रावधानों मे आगामी तीन वर्षों की विद्यालय विकास योजना का निर्माण नये दिशा-निर्देशों के अनुसार समिति इसी साल करेगी लेकिन बुनियादी ढांचे व शिक्षण सुविधाओं की हर वर्ष समीक्षा की जायेगी।
ऐसी होगी अब एसएमसी
योजना अनुसार 75 प्रतिशत सदस्य अभिभावक ही होंगे जिनमें 50 प्रतिशत प्रतिशत मातृ शक्ति की भागीदारी अनिवार्य होगी। 25 प्रतिशत सदस्य शिक्षक, स्थानीय जनप्रतिनिधि, पूर्व छात्र, शिक्षाविद् एवं अपने क्षेत्र में विशेष योगदान देनेवाले व्यक्ति हो सकेगें। समिति का गठन दो वर्ष के लिए होगा व प्रत्येक माह बैठक अनिवार्य होगी। नए प्रावधानों में समिति के सदस्यों की संख्या का आधार विद्यालय का नामांकन होगा। 101 विद्यार्थियों पर 12 से 15 सदस्य, 100 से 500 विद्यार्थियों पर 15 से 20 सदस्य तथा 500 से अधिक नामांकन पर 20 से 25 सदस्य एसएमसी में होगे। अध्यक्ष अभिभावक व सचिव संस्था प्रधान होगें।
इनका कहना है
- सर्व शिक्षा अभियान 2011 (Sarva Shiksha Abhiyan 2011) में एसएमसी विद्यालय व्यवस्था का विकेंद्रीकरण का मुख्य अंग है। यही कार्य राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान 2014 के सामुदायिक गतिशीलता के सिद्धांत व एनईपी 2020 (NEP 2020) में स्थानीय व्यक्तियों की विद्यालय विकास मेें भूमिका एवं समग्र शिक्षा 2018-2022 मे समिति के महत्व को देखते हुए इन सभी उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक दिशा-निर्देशों की आवश्यकता समझी जा रही थी। नये निर्देश इसी संदर्भ में लागू किये गये है। प्रमेंद्र शर्मा, सहायक निदेशक चूरू
-एस एम सी 2026 के नये दिशानिर्देश अभी केंद्र द्वारा जारी हुए हैं। राज्य स्तर पर इन्हें लागू किये जाने की प्रक्रिया की प्रतीक्षा है एवं नवीन प्रावधानों से प्रतीत होता है कि सामुदायिक सहभागिता से विद्यालय के सर्वांगीण विकास में सहायक होगा। मुकुल भाटी प्राचार्य, राजकीय एलएन बालिका उमा विद्यालय चूरू
- एसएमसी गठन के लिए नवीन निर्देश 2026 की सूचना विभिन्न माध्यमों से मिली है। केंद्र स्तर पर लागू नये दिशानिर्देश विद्यालय के सर्वांगीण विकास में निर्णायक भूमिका निभायेगें। संतोष महर्षि, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी समग्र शिक्षा चूरू