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Churu : सफाई पर ‘मॉक ड्रिल’ कब? पार्किंग में तब्दील हुआ भरतिया अस्पताल

जिले का सबसे बड़े राजकीय भरतिया अस्पताल के अग्रभाग में नव निर्माण का कार्य चल रहा है। इस निर्माण कार्य और पार्क के बीच एक गैलरी बनी हुई है जिससे लोग आवाजाही करते है।

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Govt DB Hospital Churu

चूरू. आमतौर पर फायर आदि को लेकर भरतिया अस्पताल में मॉक ड्रिल होती है लेकिन सफाई व्यवस्था को मॉक ड्रिल (Mock Drill) क्यों नहीं होती का सवाल दाग कर कुछ रोगियों और उनके साथ आए अभिभावकों ने एक नई बहस छेड़ दी। वास्तव में अस्पताल में हुई मॉक ड्रिल पर चर्चा शुरू हुई तो तपाक से लोगों ने कहा आगजनी का कारण कुड़ा करकट भी है तो फिर उसे हटाने या फिर साफ सफाई को लेकर पूर्वाभ्यास क्यों नहीं किया जा सकता है।

अजीबो गरीब व्यवस्था
जिले का सबसे बड़े राजकीय भरतिया अस्पताल (Government Bhartiya Hospital) के अग्रभाग में नव निर्माण का कार्य चल रहा है। इस निर्माण कार्य और पार्क के बीच एक गैलरी बनी हुई है जिससे लोग आवाजाही करते है। नए आउट डोर के निर्माण के कारण अभी अस्पताल के इंडोर में वैकल्पिक व्यवस्था कर रखी है जहां एक ही कमरे में 6 से 8 चिकित्सकों के बैठने की व्यवस्था है और कक्ष में चारो ओर रोगियों का हजूम। इंडोर के बाहरी परिसर की ओर खुलती दवा काउंटर और सामने पार्क। परिसर में जहां देखों वहीं वाहनों की पार्किंग, अस्पताल के आगे पीछे कचरे का शुमार, फिर भी अस्पताल प्रशासन मौन बना हुआ है।

पार्क में सूखती दूब, मुरझाते पौधे
अस्पताल परिसर में पार्क बना हुआ है, पूर्व राज्यसभा सदस्य के संसदीय निधि कोष से बने पार्क का बाद में विस्तार भी हुआ, दूब के लॉन के साथ पौधे भी लगाए गए, लेकिन सारसंभाल के अभाव में पार्क अब सूखा परिसर बनता जा रहा है। यहां लगी बैंचे टूट चुकी है, रोगी और लोग पार्क में छाया की तलाश करते हैँ। पार्क की दशा देकर यहां बैठी महिला सावत्री तंज कसते हुए कहती है कि यो बाग है कै, इस्यो हौवे बाग राम म्हानै तो ठा ही कौनी हो, तभी दूसरी महिला रामादेवी कहती है कि चुप रै भैण.. ओ शहर है ज्यादा बोलणों ठीक कोनी, म्हारी फोटू मत ले भाया और कोई आफत आ ज्यागी: यह किसी एक की नहीं जिससे भी बात करों वह दो शब्दों में कहता है, आप ही देखलों न इसमें पूछने की क्या जरूरत है।

जहां हाथ रखो वही दर्द
अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर लोग कहते हैं कि आप चाहे कितना ही लिख दो, यहां की सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हो सकता है। भला हो उस भामाशाह डेडराज भरतिया परिवार का जिन्होंने बेशकीमती जमीन पर शानदार अस्पताल बनवाया, लेकिन उन्हें क्या पता था कि अस्पताल परिसर की यह हालत होगी क्योंकि जहां हाथ रखो वहीं दर्द है। लोग कहते है ज्यादा कहने में क्या समझों तो इशारा की काफी है।

इनका कहना है
अस्पताल की सफाई व्यवस्था ठेके पर दी हुई है। संवेदक कंपनी ने 70 से 80 कर्मचारी सफाई व्यवस्था में लगा रखे हैं। आइसीयू, इमरजेंसी, ओटी, ओपीडी, सर्जिकल ओपीडी (Surgical OPD) में दिन में तीन बार सफाई होती है, जबकि कुछ जगहों पर दिन में एक बार ही सफाई होती है। सफाई व्यवस्था के लिए एक चेक लिस्ट भी बना रखी है। सफाई होने पर टिक कर दिया जाता है, जबकि टिक नहीं कर रखा होता है तो लेखा शाखा को टिक नहीं होने पर भुगतान नहीं करने के निर्देश दिए हुए हैं। डॉ. दीपक चौधरी, चिकित्सा अधीक्षक, राजकीय डीबी अस्पताल (Govt DB Hospital Churu), चूरू