जनता का कहना है कि अस्पताल जीवन देने का केंद्र होता है, न कि प्रदूषण के बीच बीमारियों को बढ़ाने का स्थान। प्रस्तावित नई जगह रीको एवं इंडस्ट्रीज एरिया के भीतर बताई जा रही है, जहां फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण का प्रभाव रहता है।
चूरू. सरदारशहर में प्रस्तावित राजकीय अस्पताल मय ट्रॉमा सेंटर के निर्माण को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। दो वर्ष पूर्व सरकार की ओर से स्वीकृत और आवंटित भूमि पर 50 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस अस्पताल को लेकर जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कुछ लोग निजी स्वार्थ के चलते अस्पताल को औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित कराने का प्रयास कर रहे हैं।
फैक्ट्री धुएं के बीच अस्पताल का विरोध
जनता का कहना है कि अस्पताल जीवन देने का केंद्र होता है, न कि प्रदूषण के बीच बीमारियों को बढ़ाने का स्थान। प्रस्तावित नई जगह रीको एवं इंडस्ट्रीज एरिया के भीतर बताई जा रही है, जहां फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण का प्रभाव रहता है। लोगों का तर्क है कि रीको क्षेत्र के भीतर अस्पताल बनाना लाखों लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होगा।
दो वर्षों से इंतजार
इस अस्पताल की स्वीकृति के बाद से ही वे इसके शीघ्र संचालन की प्रतीक्षा कर रहे थे। बीते दो वर्षों में कई बार आंदोलन, आमरण अनशन और मशाल जुलूस निकाले गए, तब जाकर अस्पताल की स्वीकृति मिली थी। अब यदि स्थान परिवर्तन किया जाता है तो यह जनता के विश्वास के साथ धोखा होगा।जनता की मांग है कि पूर्व में आवंटित भूमि, जो बापा सेवा सदन के पास स्थित है, वहीं पर अस्पताल निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ कराया जाए।
दो दिन का अल्टीमेटम
सरदारशहर विकास मंच के कार्यकर्ताओं एवं शहरवासियों ने प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि यदि तय समय में पूर्व आवंटित भूमि पर अस्पताल निर्माण शुरू करने का निर्णय नहीं लिया गया तो तहसील कार्यालय पर कब्जा कर उग्र आंदोलन किया जाएगा। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी अप्रिय स्थिति की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इस दौरान एडवोकेट राजेन्द्र राजपुरोहित, एडवोकेट शंकरदास, एडवोकेट हेमराज, बबलू खान, गोविंद बगडि़या, भवानी शंकर, बजरंगलाल, पवन कुमार, भवानीशंकर, बजरंगलाल राव, हसन, कासम, इमरान, रतनलाल, उम्मेद, आदिल, रामप्रसाद, ओमप्रकाश, गिरधारी सहित आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।