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churu news– एक दिन में 30-40 दफा बंद होते हैं रेलवे फाटक, गुजरती हैं 40 रेलगाडिय़ां

जी का जंजाल बन रेलवे फाटक: एम्बुलेंस चालक कितना ही सायरन बजाए लेकिन नहीं खोलते रेल फाटक चूरू. सुजानगढ़. क्षेत्रवासियों के लिए आधा दर्जन रेलवे फाटक जी का जंजाल बने हुए हैं। दिनो-दिन यह समस्या विकराल होती जा रही है। प्रतिदिन 30-40 दफा रेल फाटक बंद होने से एक तिहाई आबादी की सामान्य गतिविधि ठहर सी जाती है। फाटक खुलने के इंतजार में प्रतिदिन हजारों लोगों के कई घंटा समय बर्बाद हो रहा है। अफसोस की बात यह है कि इसके समाधान को लेकर रेल प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि तक कोई गम्भीर नहीं है।

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Dec 14, 2022
churu news-- एक दिन में 30-40 दफा बंद होते हैं रेलवे फाटक, गुजरती हैं 40 रेलगाडिय़ां

जी का जंजाल बन रेलवे फाटक: एम्बुलेंस चालक कितना ही सायरन बजाए लेकिन नहीं खोलते रेल फाटक
ठहर जाते हैं चक्के, लोग होते हैं परेशान
समाधान को लेकर रेल प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि तक कोई गम्भीर नहीं
चूरू. सुजानगढ़. क्षेत्रवासियों के लिए आधा दर्जन रेलवे फाटक जी का जंजाल बने हुए हैं। दिनो-दिन यह समस्या विकराल होती जा रही है। प्रतिदिन 30-40 दफा रेल फाटक बंद होने से एक तिहाई आबादी की सामान्य गतिविधि ठहर सी जाती है। फाटक खुलने के इंतजार में प्रतिदिन हजारों लोगों के कई घंटा समय बर्बाद हो रहा है। अफसोस की बात यह है कि इसके समाधान को लेकर रेल प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि तक कोई गम्भीर नहीं है। क्षेत्रीय सांसद राहुल कस्वा को आमजन के साथ-साथ पार्टी के पदाधिकारियों ने अनेक बार ध्यान दिलाया लेकिन वे भी समाधान नहीं कर सके जबकि सादुलपुर क्षेत्र में अनेक आरयूबी बने है। रेलवे स्टेशन से लाडनूं की ओर पांच तथा छापर की ओर से एक रेल फाटक शहर के बीच अवरोध बने हुए है। जब फाटक बंद होता है तब 10 से 20 मिनट का समय खुलने में लग जाता है ओर अनेक बार रेलगाडिय़ों की क्रॉङ्क्षसग होती है तब करीब आधे घंटे तक फाटक नहीं खुलता। पिछले 2-3 माह से एक नम्बर फाटक पर समस्या दुगनी इसलिए हो गई कि विद्युतीकरण व पटरी कार्य के चलते एक इंजन बार-बार अप-डाउन इधर-उधर की पटरियों पर होता है तो यह फाटक बंद होता है, अन्य फाटक नहीं। रेल लाइन के उतर दिशा में एक दर्जन वार्ड जो आबादी व क्षेत्रफल की ²ष्टि से बड़े है अर्थात कुल आबादी का 25-30 प्रतिशत हिस्सा दूसरी तरफ रहता है। नया कोतवाली पुलिस थाना उधर (उतर दिशा) में है तो ज्यादातर आबादी बाजार व अन्य कार्यालय इधर (दक्षिण दिशा) में है। सरकारी अस्पताल में जाने वाली आपातकालीन सेवा एम्बुलेंस चाहे कितना ही सायरन बजाए लेकिन रेल फाटक अंगद का पांव ही साबित होते हैं। ऐसे में घायल या प्रसूता की व्यथा कोई नहीं समझ सकता। फाटक नम्बर तीन से होकर एक दर्जन गांवों का सम्पर्क है इसलिए ग्रामीण भी इस पीड़ा को झेल रहे है। फाटक नं. 5 से होकर जमालपुरा रास्ता जाता है जिस पर करीब 200 कारखाने तिरपाल व्यवसाय के है। जहां पर पूरे प्रदेश के लोग तिरपाल लेने पहुंचते है।

रेलवे फाटकों की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होना चाहिए
फाटक बंद होने की समस्या पुरानी है। करीब 30 हजार की आबादी के लोगों की समस्या के लोगो की समस्या की ओर नेताओं का ध्यान नहीं जाना, चिन्ताजनक है। मैं इस बारे में हमारी पार्टी सुप्रीमो व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल का ध्यान दिलाऊंगा।
सीताराम चौधरी, आरएलपी नेता सुजानगढ़

फाटक नं. तीन पर आरयूबी बनना चाहिए ताकी छोटे वाहन चालकों को दिक्कत न हो। मुझे नलियाबास से बाजार या अन्य कार्यो के लिए 4-5 दफा जाना पड़ता है तब करीब 45 से 60 मिनट समय फाटक खुलने के इन्तजार में बर्बाद हो जाता है।
पुखराज कच्छावा, अध्यक्ष सुजानगढ़ टेंट डीलर एसोसिएशन, सुजानगढ़

फाटक नं. 5 से जमालपुरा मार्ग पर सैकड़ों कारखाने तिरपाल के है जहां पर हजारों लोगो को रोजगार मिलता है, तिरपाल खरीदने पंजाब, हरियाणा व प्रदेश के किसान डिग्गी व तिरपाल खरीदने आते है, हमारे साथ उनको भी परेशानी होती है।
मो. रफीक खीची, तिरपाल व्यवसायी सुजानगढ़

एम्बुलेंस, दमकल जैसी आपातकालीन सेवाओं के दौरान होने वाली परेशानी दिल को झकझोरने वाली है इसलिए एक नम्बर फाटक पर अंडर ब्रिज या ओवर ब्रिज बनना चाहिए।
नत्थूराम महरिया, शिक्षाविद गांधी बस्ती सुजानगढ़

Published on:
14 Dec 2022 01:07 pm
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