चूरू

churu history: रतननगर शुभ से बस्यो, बीच बहवे है खेत

churu history: बाद में उन्होंने कस्बे को परकोटे के बीच में बसाया गया। इसमें उस वक्त 160 प्लाट काटे गए थे, जिसमें करीब 74 प्लाट कटे थे।

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Jun 30, 2022
churu history:  रतननगर शुभ से बस्यो, बीच बहवे है खेत
churu history: रतननगर शुभ से बस्यो, बीच बहवे है खेत

मनीष मिश्रा.

churu history: चूरू, आज ही के दिन 1861 में शहर के निकटवर्ती कस्बा रतननगर की स्थापना हुई थी, कस्बे के जन्म को असाधरण परििस्थतियों में होने के बावजूद साल दर साल विकास की ओर अग्रसर हो रहा है। आज की युवा पीढ़ी कस्बे का इतिहास भूलती जा रही है। जानकारों की माने तो बिसाऊ के रावराजा के वंशजो व सेठ नंदराम केडिया के विचार मेल नहीं खाए। बाद में तत्कालीन बीकानेर महाराज ने केडिया को चूरू रामगढ़ के मध्य ऊबड-खाबड़ जमीन दी थी, जिससे उन्हें कोई विशेष आय नहीं होती थी। बाद में उन्होंने कस्बे को परकोटे के बीच में बसाया गया। इसमें उस वक्त 160 प्लाट काटे गए थे, जिसमें करीब 74 प्लाट कटे थे।

शिक्षा का प्रसार करने के लिए ब्राह्मण व पंडितों को निशुल्क भूखंड उपलब्ध कराए गए। यहां की भूमि पथरीली होने के कारण पत्थर निकालकर परकोटे का निर्माण कराया गया जो कि करीब छह फिट चौडा था। नगर के प्रत्येक चौराहे पर नीम, पीपल आदि के पौधे लगाए गए। इतिहासविद केसी सोनी ने बताया कि चौपड़ा बाजार उस वक्त मुख्य बाजार हुआ करता था। इस बाजार के चार दरवाजे हुआ करते थे, जहां से यात्रियों का आवागमन हुआ करता था। देपालसर पर व्यापारियों का माल आता, जिन्हें ऊंटगाडि़यों से लाया जाता था। उन्होंने बताया कि दुकानों के आंगन ऊंटगाडियों के समानांतर बनाए गए थे ताकि माल उतारने में कोई परेशानी नहीं हो। मोरियों व द्वारो के समीप बुर्ज बनाए गए थे, जहां सुरक्षा प्रहरी तैनात रहते थे। सभी बाजारों की दुकान का तल एक सूत में था। सेठ साहूकारों ने आकर्षक हवेलियों का निर्माण कराया।

जालान, पौदार, गाडोदिया, केडिया, चांदगोठिया आदि सेठों की सात धर्मशालाएं बनाई गई थी। सेठों की हवेलियों में आने वाले लोगों का आवश्कतानुसार स्वागत सत्कार किया जाता था। जरूरतमंद लोगों की आवश्यकताएं भी पूरी की जाती थी। तत्कालीन सरकार की ओर से 1943 में अंग्रेजी चिकित्सालय शुरू किया गया था। रायबहादुर सेठ शिवरामदास केडिया ने बीकानेर सरकार को एक भवन दान किया था। इस पर सरकार की स्वीकृति पर वहां प्राथमिक विद्यालय शुरू हुआ। डालूराम महर्षि ने संगीत व कवि सम्मेलन की शुरुआत की। जानकारों की माने तो नगर के बाहरी तरफ फुटबाल का मैदान था, राजस्थान सरकार के बनने के बाद में पुलिस स्टेशन के पास विद्यालय के लिए बड़ा प्रांगण बनाया गया। 1964 के बाद इसे व्यिस्थत किया गया व जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ।

Published on:
30 Jun 2022 12:42 pm