चूरू

जिम्मेदार खामोश, कमरे में बंद लाखों की ईको कॉर्डियोग्राफी मशीन

मेडिकल कॉलेज व अस्पताल प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
2 min read
Jun 21, 2018
churu hospitan news
churu photo

चूरू.

राजकीय डेडराज भरतिया चिकित्सालय में करीब एक साल पहले आई ईको कॉर्डियोग्राफी मशीन ताले में बंद पड़ी है।करीब छह माह पहले मशीन को इंस्टॉल भी करा दिया गया। लेकिन सरकार, चिकित्सा विभाग, मेडिकल कॉलेज व चिकित्सालय प्रशासन की अनदेखी के कारण मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। मशीन भेजने के एक साल बाद भी सरकार व चिकित्सा विभाग यहां कॉर्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति कर सका। इसके कारण मरीजों को ईको कॉर्डियोग्राफी के लिए निजी अस्पतालों, सेंटरों व सीकर, बीकानेर-जयपुर जाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि अस्पताल में प्रतिदिन १० से १५ मरीज हार्ट के पहुंचते हैं और उन्हे जांच के लिए १५ से २० हजार रुपए प्रतिदिन निजी सेंटरों को देने पड़ रहे हैं। महीने में देखा जाए तो उक्त जांच के लिए पांच लाख से अधिक रुपए मरीजों की जेब से जा रहे हैं। जबकि सरकारी में शुरू होने पर पांच सौ रुपए में जांच हो जाएगी।

ईको कॉर्डियोग्राफी शुरू होने से सरकारी अस्पताल में ही हार्ट संबंधी बीमारियों की बेहतर जांच व उपचार हो सकेगा। बाहर लैबों में ईको कॉर्डियोग्राफी के लिए करीब १५ सौ से दो हजार रुपए लिए जा रहे हैं। जबकि सरकारी अस्पताल में शुरू होने पर महज तीन सौ से पांच सौ रुपए में ही यह जांच हो जाएगी। इसके अलावा पेंशनर, बीपीएल व बीपीएल के समकक्ष मरीजों को निशुल्क सुविधा मिल सकेगी।

19 लाख की मशीन कब आएगी काम
19 लाख रुपए से अधिक की मशीन का उपयोग कब होगा इसका अभी तक कोई पता नहीं हैं। हलांकि मशीन एमसीएच के रेडियोलॉजी डिमार्टमेंट में इंस्टॉल करवा दी गई है। इसका संचालन कौन करेगा किस तरह होगा आदि की कोई जानकारी नहीं है।

पकड़ी जा सकती है हृदय की बीमारी
एशोसिएट प्रोफेसर डा. हनुमान जयपाल ने बताया कि ईको कॉर्डियोग्राफी से हृदय की गतिविधि व स्थिति का पता लगाया जाता है। हृदय में पाल्मोनरी वॉल्व, ट्राईक्यूस्पिड वॉल्व, एवोट्रिक वॉल्व तथा मिट्रल वॉल्व होते हैं। इनकी गतिविधि मशीन से से जानी जा सकती है। इसके अलावा इंजेक्शन फेक्शन जो हार्ट की पंम्पिंग एक्शन कि स्थिति को बताता है। हृदय घात के बाद हृदय की धमनियां सही से काम कर रही या नहीं इसकी स्थिति आसानी से स्पष्ट हो जाती है। यह हृदय के मरीजों के उपचार में बेहतर साबित होती है। इससे शुरूआती चरण में ही हार्ट की बीमारी पकड़ में आ जाती है चाहे बच्चे हों या किसी भी आयु के मरीज।

इको कॉर्डियोग्राफी मशीन इंस्टॉल हो चुकी है। मेडिकल कॉलेज के कुछ डाक्टरों को प्रशिक्षण दिलवाकर इसे जल्द ही शुरू किया जाएगा। विभाग से संचालन की गाइडलाइन लेकर जल्द ही मरीजों को इसका लाभ दिया जाएगा। इसके लिए फिजीशियन को लगाया जाएगा।
प्रो. वीरबहादुर सिंह, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज, चूरू

Published on:
21 Jun 2018 10:46 pm