
रतनगढ़.
शहर से करीब 13 किमी दूर सालासर रोड पर स्थित गांव भींचरी में सोमवार सुबह हजारों लोगों की भीड़ थी। लोगों का सिर गर्व से ऊंचा था अनेक लोगों के हाथों में तिरंगा झंडा था लेकिन वे सारे गमगीन थे। हर किसी की निगाहें गांव के बहादुर लाडले किशनसिंह के पार्थिव देह को मानो ढूंढ रही थी। यदि किसी की जुबां पर कोई शब्द आता तो वह उसकी बहादुरी के सिवा कुछ नहीं बोलता। लेकिन शहीद किशनसिंह की पत्नी, मां व अन्य परिजनों का करुणक्रंदन सुनकर हर किसी की आंखों में आंसू छलक पड़ता था। वहीं दोपहर करीब दो बजे चार वर्षीय बेटे धर्मवीर ने जब पिता को मुखाग्नि दी तो वहां एकत्र लोगों के आंसू छलक पड़े। सेना के अधिकारी भी गमगीन हो गए।
बार-बार बेहोश रही थी पत्नी
शहीद होने के तीसरे दिन सोमवार को 11.30 बजे जब पार्थिव देह घर पर पहुंचा तो पत्नी व अन्य परिजनों का करुणानाद सभी को झकझोर कर रख दिया। वीरांगना संतोष कंवर की हालत इतनी कमजोर हो गई थी वह बार-बार बेहोश हो रही थी। अंमिम संस्कार के बाद जब प्रशासन व अधिकारी वापस जाने लगे तो पत्नी की हालत और खाराब हो गई। सूचना पर जिला कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल ने सीएमएचओ डा. मनोज शर्मा व फिजीशियन डा. जीवराज को शहीद वीरांगना के घर वापस भेजकर वीरांगना के उपचार करने का निर्देश दिया। सीएमएचओ डा. शर्मा ने बताया कि वीरांगना की देखरेख के लिए डा. लोकेश कुमार व नर्सिंग स्टाफ मुकेश की ड्यूटी लगाई गई है। हालांकि वीरांगना के स्वास्थ्य में सुधार है।
चचेरा भाई बोला आतंक का सफाया होना जरूरी है
वहीं शहीद किसन सिंह के चचेरे भाई समुद्रसिंह ने कहा कि उसका भाई देश के लिए अमर हो गया यह उसके लिए गर्व की बात है। लेकिन हम देश के साहसी सैनिकों से अपील करते हैं कि सीमा से आतंक का सफाया करने में बहादुरी से डटे रहे। समुद्रसिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला को आज राजस्थान में सरकार के सपथ ग्रहण में बुलाया जा रहा है। उनका बेटा फारुक अब्दुल्ला आंतकियों को सपोर्ट करता है। यह दुर्भाग्य की बात है जो लोग कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, आतंकियों को सह दे हैं ऐसे लोगों को राजस्थान की पवित्र धरती पर नहीं आने देना चाहिए। सरकार के इस निर्णय से शहीद परिवार को बहुत दुख हुआ है। उनकी भावना आहत हुई है।
भींचरी के अलावा अनेक गांवों में दी श्रद्धांजलि
शहीद का पार्थिव देह जैसे ही बीकानेर से चला तो जगह-जगह लोग किशनसिंह को सलामी देने के लिए रास्ते में खड़े हो गए। श्री डूंगरगढ़, सेरूणा गांव, संगम चौराहा, लूंछ फांटा, सांगासर, राजलदेसर आदि स्थानों पर सड़क के दोनों तरफ खड़े लोगों ने किशनसिंह को सलामी व श्रद्धांजलि दी और भारत माता के जयकारे लगाए। लोगों ने नम आंखों से शहीद को श्रद्धांजलि दी। राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय भींचरी के सामने भी विद्यार्थियों ने श्रद्धांजलि दी।
सैन्य सम्मान से किया अंतिम संस्कार
किशनसिंह का अंतिम संस्कार सैन्य सम्मान के साथ श्मशान की बजाय उनकी खुद की जमीन पर किया गया। अंंतिम संस्कार से पहले सेना के जवानों से गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सेना के अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों ने भी श्रद्धांजलि दी। सांसद राहुल कस्वां, जिला कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक राममूर्ति जोशी, विधायक अभिनेश महर्षि, विधायक रहे राजकुमार रिणवा, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी राजवीर चौधरी, प्रधान गिरधारीलाल बांगड़वा, सुजानगढ़ प्रधान गणेश ढाका, एसडीएम संजू पारीक, डीएसपी नारायण दान, सीएमएचओ मनोज शर्मा, पालिका अध्यक्ष इंद्र कुमार, डा. जीवराज सिंह, कश्मीर से आए सेना की 55 आरआर बटालियन के कर्नल संदीप दुग्गल, कर्नल भवानीदत्त उपाध्याय, मेजर वैभव जावलकर, मेजर अर्जुनसिंह, मेजर अमृतपाल सिंह भल्ला, मेजर बृजपाल सिंह वृख, लेफ्टिनेंट सत्येंद्र धनखड, कैप्टन निशांत चौधरी, कैप्टन शिवराज सिंह, कैप्टन स्नेहाज सिन्हा सहित हजारों की तादात में लोग मौजूद थे।
पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगे
लोगों में किशनसिंह के जाने का गंभीर दुख था लेकिन उनके मन में गुस्सा भी था। युवाओं ने पाकिस्तार मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। किशनसिंह अमर रहे, जब तक सूरज-चांद रहेगा तबतक किशनसिंह तेरा नाम रहेगा, वंदेमातरम, भारत माता की जय के गगनभेदी जयकारे भी लगाए। बेटे ने हात में तिरंगा झंडा लेकर भारत माता के जयाकारे लगाए।
यूं चला घटना क्रम
- शनिवार सुबह आतंकी मुठभेड़ में लगी गोली
- रविवार सुबह करीब एक बजे जम्मू से पार्थिव देह प्लेन से दिल्ली लाया गया
- रविवार करीब ३ बजे बीकानेर सेना मुख्यालय पहुंचा किशनसिंह का पार्थिव देह
- सोमवार सुबह करीब आठ बजे बीकानेर स पार्थिव देह गांव भींचरी के लिए रवाना
-सोवमर पूर्वाह्न 11.40 बजे भींचरी गांव पहुंचा शव
-सोमवार दोपहर दो बजे खुद की जमीन पर अंतिम संस्कार
जानिए परिवार की स्थिति
शहीद किशनसिंह के पिता हनुमानसिंह की 2011 में मौत हो गई थे। किशनसिंह व जीवराजसिंह दो भाई थे। बड़ा भाई जीवराज सिंह कोलकाता में ट्रक चलाता है। माता मोहन कंवर व पत्नी संतोष कंवर दोनों गृहणी हैं। किशन के दो बेटे धर्मवीर (4) व मोहित (2) हैं। घर में नौकरी करने वाला केवल किशनसिंह था। वह 2010 में सेना में भर्ती हुआ था। करीब नौ साल तक सरहदों की रक्षा की। 2012 में फतेहपुर के गांव डाबड़ी की संतोष कंवर से शादी हुई थी। 28 नवंबर को ही गांव से ड्यूटी पर गया था। कुछ महीने बाद बीकानेर में उसकी नियुक्ति होने वाली थी। किशनङ्क्षसह का जन्म 9 दिसंबर 1998 को हुआ था।