ग्रामीणों ने बताया कि बढ़ती गर्मी का असर अब दुधारू पशुओं पर भी पड़ने लगा है, जिससे दुग्ध उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
सादुलपुर. गर्मी प्रारंभ होने के साथ ही मौसम में तेजी से बदलाव होना शुरू हो गया है तथा तापमान में लगातार बढ़ोतरी के कारण दिन के साथ-साथ अब रात्रि भी गर्मी का असर बढ़ गया है। लोग अब घरों, दुकानों में पंखों और कूलरों का सहारा लेने लगे हैं। वहीं मच्छरों का बढ़ता प्रकोप भी आमजन सहित पशुधन प्रभावित और परेशान होने लगे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बढ़ती गर्मी का असर अब दुधारू पशुओं पर भी पड़ने लगा है, जिससे दुग्ध उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। गर्मी के कारण बाजारों में भी रौनक दोपहर बाद कम होने लगी है तथा स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों पर भी गर्मी का असर दिखाई देने लगा है।
पशुओं के खान पान में बदलाव है जरूरी
सहायक पशुधन निरीक्षक डॉ. नरेश जांगिड़ ने बताया कि गर्मी के मौसम में पशुओं के खानपान में बदलाव करना बेहद जरूरी है। दुधारू पशुओं को संतुलित व पोषणयुक्त आहार देना चाहिए। इस समय शरीर में कैल्शियम व मिनरल की जरूरत बढ़ जाती है, इसलिए चारे और दाने में पोषक तत्वों से भरपूर सामग्री शामिल करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि पशुओं को उनकी उम्र और वजन के अनुसार ही दाना देना चाहिए। साथ ही दिन में कई बार साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराना जरूरी है, क्योंकि पानी की कमी से पशु जल्दी कमजोर हो जाते हैं और दूध उत्पादन में गिरावट आ सकती है।
भैंसों को गर्मी से अधिक खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी का असर भैंसों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। इसका मुख्य कारण उनका काला रंग होता है, जो धूप की गर्मी को अधिक सोखता है। इसलिए गायों की तुलना में भैंसों की देखभाल गर्मी में ज्यादा जरूरी हो जाती है। पशुपालकों को चाहिए कि वे भैंसों को दिन में एक-दो बार पानी से नहलाएं या उन्हें पानी में बैठने की व्यवस्था करें। इसके अलावा तेज धूप से बचाने के लिए छायादार स्थान का प्रबंध करना आवश्यक है।
छाया और ठंडक की व्यवस्था जरूरी
डॉ. जांगिड़ ने बताया कि पशुओं को हवादार और छायादार स्थान पर बांधना चाहिए। कच्ची झोपड़ी, छान या खुले मकान जहां हवा का आवागमन हो, वहां पशुओं को रखने से गर्मी से राहत मिलती है। हीट वेव या लू की स्थिति में पशुशाला के चारों ओर जूट की बोरी या तिरपाल लगाकर उन्हें दिन में दो-तीन बार पानी से भिगोना चाहिए, जिससे वातावरण ठंडा बना रहता है और पशुओं को राहत मिलती है।
छोटे उपाय, बड़ा फायदा
यदि पशुपालक इन छोटे-छोटे उपायों को अपनाते हैं, तो गर्मी के मौसम में भी पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है। इससे न केवल पशुओं की सेहत बेहतर रहेगी, बल्कि दुग्ध उत्पादन में होने वाली गिरावट से भी बचा जा सकेगा। इसके अलावा घरों में प्रतिदिन कूलरों का पानी बदलने उनका साफ रखने,नाले नालियां साफ रखने, सिर पर तौलिया रखने, गर्मी में घरों से बाहर नहीं निकलने, पानी की आपूर्ति रखने आदि सावधानियां जरूरी हैं।
रातों की ठंडक घटी
बदले मौसम के मिजाज के चलते आसमान साफ रहने के कारण सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ रही हैं, जिससे दिन में तपिश बढ़ गई है और आमजन को गर्मी का एहसास होने लगा है। वहीं, रातों की ठंडक भी अब धीरे-धीरे कम हो रही है। मंगलवार को सुबह से ही आसमान साफ रहा और सुबह 10 बजे के बाद धूप की तीव्रता बढ़ने लगी, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
दोपहर होते-होते गर्मी का असर सड़कों और बाजारों में साफ दिखाई देने लगा। मुख्य मार्गों पर आवाजाही कम हो गई। दुकानदारों के अनुसार, तेज धूप के कारण ग्राहक भी कम नजर आए और लोग जरूरी कामों के अलावा घर से बाहर निकलने से बचते दिखे।शाम के समय भी अब पहले जैसी ठंडक महसूस नहीं हो रही है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में तापमान में और वृद्धि होने की संभावना है।दोपहर में तेज धूप के चलते लोग छांव का सहारा लेते नजर आए, जबकि सुबह का मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहा। खेतों में कार्य करने वाले किसान व मजदूर सुबह से दोपहर तक ही काम करते नजर आए और दोपहर बाद विश्राम करने लगे। गर्मी के कारण ठंडा पेय की मांग भी बढ़ने लगी। आइसक्रीम व कोल्ड ड्रिंक की दुकानों में बिक्री बढ़ने लगीं है।