क्षेत्र में इस समय गेहूं की कटाई जोरों पर है, जबकि चना और सरसों की अधिकांश फसलें कट चुकी हैं। हालांकि, कई खेतों में अभी भी चने की कटाई जारी है। ऐसे में बिगड़ा मौसम किसानों की मेहनत पर संकट बन सकता है।
चूरू. नव संवत्सर के चैत्र शुक्ल पक्ष के पहले पखवाड़े में मौसम में निरंतर चल रहे बदलाव का क्रम वैशाख आते आते भी जारी रहा। गुरुवार को सुबह से आसमान में गहरे बादल छाए। हालांकि बीच बीच में धूप भी खिली और हवाएं चली। चूरू में बने बरसाती मौसम से बढ़ती गर्मी को ब्रेक लगे लेकिन खेतों में कटी और पकी फसलों को लेकर किसानों की चिंता बढ़ी।
फसल कटाई का कार्य अंतिम दौर में
जिले में सरसो और चने की कटाई करीब करीब पूर्णता की ओर है फिर भी कई क्षेत्रों में जहां कटाई अंतिम दौर में है तो कई खेतों में कटी हुई फसल की ढेरिया पड़ी हुई है, जिन्हें समेटने के लिए किसान दिनरात जुटे हैं। सरदारशहर, भानीपुरा, चूरू क्षेत्र में सरसों की कटाई लगभग पूरी हो गई है लेकिन जहां कृषि कूप सिंचित खेतों में गेंहू की कटाई का काम चल रहा है। पिछले दिनों हुई बारिश से जहां गेंहू की फसल प्रभावित हुई वहीं रतनगढ़ तहसील क्षेत्र में जहां ईश्बगोल की कटाई चल रही थी वहां बरसात से नुकसान पहुंचा है।
मौसम अपडेट
मौसम केंद्र के अनुसार विक्षोभ के सर्वाधिक प्रभाव 3 और 4 अप्रैल को दर्ज होने तथा जोधपुर, बीकानेर आदि संभाग क्षेत्रों के कुछ भागों में तेज मेघगर्जन के साथ आंधी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इस दौरान कहीं कहीं ओलावृष्टि होने की संभावना है।
तेज हवा और बादलों से गेहूं-चना-सरसों की फसल पर किसान चिंतित
सांखूफोर्ट. क्षेत्र में इस समय गेहूं की कटाई जोरों पर है, जबकि चना और सरसों की अधिकांश फसलें कट चुकी हैं। हालांकि, कई खेतों में अभी भी चने की कटाई जारी है। ऐसे में बिगड़ा मौसम किसानों की मेहनत पर संकट बन सकता है। गुरुवार को तेज हवा और आसमान में काले बादलों के छाने से किसानों की चिंता बढ़ गई। किसानों का कहना है कि तेज हवा या बारिश होने पर कटी फसलें नुकसान का सामना कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि अधिकांश खेतों में गेहूं पककर तैयार है और कई खेतों की फसल पकाव के दौर से गुजर रही है।
किसानों ने कहा कि तेज हवा से फसलें आड़ीपड़ सकती हैं और बारिश से सूखी फसल भीगने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है। गेहूं के दाने भीगने या देर से सुखने पर काले पड़ सकते हैं, जिससे भावों में गिरावट की आशंका रहती है। ऐसे में किसान मौसम साफ रहने की भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। समाचार लिखे जाने तक आसमान में काली घटा छाई रही और मौसम अनिश्चित बना हुआ था।
तारानगर तहसील के कुछ गांवों में गिरे ओले
साहवा. जिले में सक्रिय हुए पश्चिम विक्षोभ के असर से अंचल में गुरुवार को दिनभर बादल छाए रहे, कई जगहों पर आंधिया चली और शाम को तहसील क्षेत्र के कुछ गांवों में ओले गिरे। गांव भनीण के निकटवर्ती गांव घासला और श्योपुरा सहित आसपास के कुछेक गांव में ओलावृष्टि हुई।
ओलावृष्टि (Hailstorm) के केन्द्र में गांव घासला और श्योपुरा रहा, जहां गिरे ओलों की चादर सी बिछ गई। ग्रामीणों के अनुसार शाम 6 बजे के करीब ओलावृष्टि हुई। ओले गिरने से गांव के कई खेतों में चने की पकी और कटी फसल खराब हो गई। ग्रामवासियों के अनुसार गांव घासला और श्योपुरा सहित चार पांच गांवों में शाम को हल्की आंधी आई और आसमान में घने बादल छाए।
बिजली चमकने और मेघ गर्जना के साथ ओले गिरे। चने से बड़े आकार के ओलों से एक बारगी धरती सफेद हो गई। गांव के कई लोगों ने ओलों से बर्तन भर लिए। गांव के कुछ खेतों में जहां चने की फसल की कटाई अंतिम चरण में थी और खेतों में फसल की रखी ढेरियों पर गिरे ओलों से किसानों को नुकसान हुआ।