Female Cricketers Sexual harassment case: महिला क्रिकेटरों के यौन उत्पीड़न मामले में BCB के रवैये पर हाईकोर्ट ने आपत्ति जताई है। कोर्ट ने आदेश जारी कर पूछा है कि बोर्ड ने महिला क्रिकेटरों के लिए सुरक्षित और लिंग-संवेदनशील माहौल देने में नाकामी को गैर-कानूनी और जनहित के खिलाफ क्यों न घोषित किया जाए?
Female Cricketers Sexual harassment case: बांग्लादेश हाई कोर्ट ने महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा, खासकर यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने ने एक आदेश जारी कर पूछा है कि BCB और संबंधित अधिकारियों की महिला क्रिकेटरों के लिए सुरक्षित और लिंग-संवेदनशील माहौल देने में नाकामी को गैर-कानूनी, बिना कानूनी अधिकार के और जनहित के खिलाफ क्यों न घोषित किया जाए?
बांग्लादेश के मीडिया आउटलेट डेली स्टार की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने बीसीबी को पहले के कोर्ट के निर्देशों के अनुसार तुरंत अपनी एंटी-सेक्सुअल हैरेसमेंट पॉलिसी का पालन करने का भी आदेश दिया। जब तक मामला तय नहीं हो जाता, बोर्ड को एक रिपोर्ट सबमिट करनी होगी, जिसमें बताया जाएगा कि इन उपायों को लागू करने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं?
यह आदेश पूर्व नेशनल शूटर सबरीना सुल्ताना द्वारा दायर एक रिट याचिका के बाद आया। जस्टिस अहमद सोहेल और जस्टिस फातिमा अनवर की हाईकोर्ट बेंच ने याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ता के वकील नसीरुद्दीन अहमद असीम के अनुसार, बांग्लादेश महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान जहांनारा आलम पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे।
शिकायत के बाद बीसीबी ने तीन सदस्यों की एक स्वतंत्र जांच समिति बनाई, जिसे बाद में बढ़ाकर पांच सदस्य कर दिया गया। हालांकि, अब तक कोई रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड ने समिति की फाइंडिंग्स सबमिट करने में दो बार देरी की। रिपोर्ट 31 जनवरी को आनी थी, लेकिन अभी भी यह साफ नहीं है कि इसे सबमिट किया गया है या नहीं। इस देरी और पारदर्शिता की कमी के कारण इस मामले को जिस तरह से हैंडल किया गया, उससे असंतोष पैदा हुआ।
सबरीना सुल्ताना ने इन चिंताओं के कारण ही महिला खिलाडि़यों की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस निर्देशों की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। शुरुआती सुनवाई के बाद कोर्ट ने नियम और अंतरिम आदेश दोनों जारी किए।