IND vs ZIM, T20 World Cup 2026: जिम्बाब्वे के खिलाफ धमाका करने के बाद भी क्यों ड्रेसिंग रूम नहीं गए हार्दिक पांड्या? जतिन सप्रू ने शेयर किया वो वाकया जब मेडल जीतने के बाद हार्दिक सीधे नेट्स पर जा पहुंचे और वो किया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। जानिए क्या था पूरा सच...
IND vs ZIM, Hardik Pandya, Jatin Sapru: सोशल मीडिया पर जतिन सप्रू ने हार्दिक पांड्या का एक ऐसा वाकया शेयर किया है, जिसे सुनकर आप समझ जाएंगे कि पांड्या में इतना कॉन्फिडेंस आता कहां से है। जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार जीत के बाद, हार्दिक ने 'प्लेयर ऑफ द मैच' का मेडल लिया, इंटरव्यू दिया, लेकिन वो ड्रेसिंग रूम में आराम करने नहीं गए। वो सीधे प्रैक्टिस पिच पर पहुंचे, गेंद उठाई और एक पूरा ओवर सिर्फ 'यॉर्कर' डालने की प्रैक्टिस की।
हार्दिक ने मैच में धमाकेदार अर्धशतक (23 गेंदों पर 50 रन) बनाया और 3 ओवर गेंदबाजी भी की। लेकिन जतिन सप्रू बताते हैं कि हार्दिक के मन में एक बात रह गई थी कि उन्हें यॉर्कर एग्जीक्यूट करनी थी। उन्हें मैच में वो आखिरी ओवर डालने का मौका नहीं मिला जिसे वो परफेक्ट तरीके से डालना चाहते थे। शायद वो इस ओवर की तैयारी ईडन गार्डन्स में होने वाले अगले मैच या फिर सेमीफाइनल और फाइनल के लिए कर रहे थे।
सप्रू ने बहुत पते की बात कही कि, 'कोई भी खिलाड़ी मैच में परफेक्ट परफॉरमेंस की गारंटी नहीं दे सकता, लेकिन प्रैक्टिस में परफेक्शन की गारंटी जरूर दे सकता है।' हार्दिक का जो ऑरा और कॉन्फिडेंस हम मैदान पर देखते हैं, वो इसी पागलपन वाली प्रैक्टिस से आता है। बहुत कम खिलाड़ी ऐसे होते हैं जिनमें अपनी कमियों को तुरंत सुधारने का ऐसा जुनून हो।
हार्दिक के लिए 23 गेंदों में 50 रन बनाना अब उनके 'ब्रेड-बटर' जैसा आसान काम हो गया है, उन्हें अपनी बैटिंग पर पूरा भरोसा है। लेकिन गेंदबाजी, जहां उन्हें टीम के लिए अहम योगदान देना है, वो उनकी लाइफ का असली 'थ्रिल' है।
जतिन सप्रू आगे कहते है कि वो खुद को उन 'क्रंच मोमेंट्स' (दबाव वाले पल) के लिए तैयार कर रहे हैं जब टीम को उनकी सख्त जरूरत होगी। हो सकता है किसी बड़े मैच में जसप्रीत बुमराह के स्पेल 17-18वें ओवर तक खत्म हो जाएं, तब हार्दिक को वो जिम्मेदारी संभालनी होगी। वो जानते हैं कि असली खेल वहीं है, जैसा उन्होंने पिछले वर्ल्ड कप के फाइनल में करके दिखाया था।
सप्रू ने आगे कह कि मैच सिर्फ मैदान पर खत्म नहीं होता। आप जो सोचकर मैदान पर उतरे हैं, जब तक उन सभी बॉक्स पर 'टिक' न लग जाए, तब तक काम अधूरा है। हार्दिक की यही सोच उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।