Ind vs SA: ऋषभ पंत की कप्तानी के रिकॉर्ड की बात की जाये तो पंत इस आईपीएल सीजन के सबसे कमजोर कप्तानों में से एक रहे हैं। कई मैचों में उनके द्वारा लिए गए फैसले दिल्ली की टीम पर भारी पड़े हैं।
IND vs SA T20 series: भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेली जाने वाली पांच मैचों की टी20 सीरीज में अब भारत की कप्तानी ऋषभ पंत करेंगे। मैच से ठीक एक दिन पहले बुधवार शाम टीम के कप्तान लोकेश राहुल चोट के चलते इस सीरीज से बहार हो गए। जिसके बाद कप्तानी की ज़िम्मेदारी पंत के कंधों पर आ गई।
अगर उनकी कप्तानी के रिकॉर्ड की बात की जाये तो पंत इस आईपीएल सीजन के सबसे कमजोर कप्तानों में से एक रहे हैं। कई मैचों में उनके द्वारा लिए गए फैसले दिल्ली की टीम पर भारी पड़े हैं। शायद यही वजह थी कि सीजन शुरू होने से पहले टूर्नामेंट की फेवरिट मनी जा रही दिल्ली प्लेऑफ में भी जगह नहीं बना पाई। युवराज सिंह जैसे दिग्गज तो उन्हें 24 साल की उम्र में टेस्ट टीम की कमान सौंपने की बात कह चुके हैं। ऐसे में IPL के दौरान उनका बर्ताव और कप्तान के तौर पर दबाव ना झेल पाना दिल्ली कैपिटल्स पर भारी पड़ा।
गेंदबाजों से पूरे ओवर नहीं करना -
कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ कुलदीप ने शानदार 3 ओवर फेंके और 4 विकेट चटकाए। लेकिन पंत ने उन्हें चौथा ओवर ही नहीं दिया। ऐसा कई बार हुआ है जब पंत ने अपने मेन गेंदबाज को पूरे ओवर ही नहीं करने दिये। वे कई बार पार्टटाइम गेंदबाजों से मैच के महत्वपूर्ण ओवर करवाते थे और टीम को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता था।
कप्तान को शोभा नहीं देता ऐसा व्यवहार -
राजस्थान के खिलाफ आखिरी ओवर में रॉवमेन पॉवेल 3 छक्के लगा चुके थे। अगर वे 3 सिक्स और लगा देते तो टीम जीत जाती। इसी बीच अंपायर ने हाइट की नो-बॉल नहीं दी। पंत ने अपने दोनों बल्लेबाजों को विरोध स्वरुप मैदान के बाहर आने का इशारा कर दिया। गली क्रिकेट में अगर कोई कप्तान ऐसा करे तो समझ आता है। इंटरनेशनल क्रिकेट खेल चुका खिलाड़ी ऐसा बर्ताव करे, तो स्वीकार नहीं किया जा सकता। पूरे घटनाक्रम के बीच पॉवेल का ध्यान भटका और वे सिक्स लगाना जारी नहीं रख सके। पंत को मुकाबले के दौरान ऐसे बर्ताव से परहेज करना चाहिए था।
इस गलती की वजह से प्लेऑफ में नहीं पहुंचे -
मुंबई के खिलाफ करो या मरो के मुकाबले में पहले तो कप्तान ऋषभ ने 12वें ओवर में डेवाल्ड ब्रेविस का आसान कैच छोड़ दिया। उसके बाद 15वें ओवर में 0 के स्कोर पर टिम डेविड का कैच पकड़ कर भी पंत ने डीआरएस नहीं लिया। दोनों ही खिलाड़ियों ने जीवनदान का पूरा फायदा उठाया। नतीजा ये हुआ कि दिल्ली ने 5 विकेट से मैच गंवा दिया।
बल्लेबाज के रूप में भी फेल -
पंत किसी भी इनिंग में लंबी पारी नहीं खेल सके। पहली बार ऐसा हुआ कि सीजन की समाप्ति के बाद उनके नाम एक भी अर्द्धशतक नहीं है। कप्तान और बल्लेबाज के तौर पर पंत की विफलता दिल्ली पर भारी पड़ी और वह प्लेऑफ के दरवाजे तक आकर भी अंदर नहीं जा सकी।