ICC T20 World Cup 2026 Super 8: टी20 विश्व कप 2026 के सुपर 8 में दक्षिण अफ्रीका से 76 रन की हार ने भारत के विश्व कप इतिहास की याद दिला दी। अब तक चार विश्व कप भारत आए हैं, लेकिन टीम ने तीन बार खिताबी सफर में सेमिफाइनल से पहले हार झेली है।
ICC T20 World Cup 2028 Super 8: टी20 विश्व कप 2026 के सुपर 8 मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 76 रनों से करारी शिकस्त दी। 187 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम 111 पर सिमट गई। यह हार निश्चित रूप से झटका है, लेकिन इतिहास गवाह है कि विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीमें भी रास्ते में हार की ठोकर खाती रही हैं।
भारत ने अब तक चार विश्व कप खिताब (दो वन-डे, दो टी20) जीते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन चार में से तीन टूर्नामेंट में टीम को ग्रुप या सुपर-8/10/12 चरण में कम से कम एक हार झेलनी पड़ी है। केवल एक बार भारत पूरे टूर्नामेंट में अपराजित रहा। यह रिकॉर्ड साबित करता है कि जीत के रास्ते में असफलताएं आती हैं, जो शायद जरूरी भी होती हैं टीम को यह एहसास कराने के लिए कि क्रिकेट के मैदान पर पुरानी सफलताओं का कोई महत्व नहीं है, हर मैच शून्य से शुरू होता है और आपको हर बार अपना बेस्ट देना होगा।
कपिल देव की कप्तानी में भारत ने अपना पहला विश्व कप जीतकर इतिहास रचा। हालांकि यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। भारतीय टीम को ग्रुप स्टेज में ऑस्ट्रेलिया से 162 रन और वेस्टइंडीज से 66 रन की हार झेलनी पड़ी। बावजूद इसके आठ मैचों में छह जीत और दो हार के साथ भारत सेमीफाइनल में पहुंचा, जहां इंग्लैंड को पटखनी दी। फाइनल में वेस्टइंडीज को 43 रनों से हराकर पहली बार ट्रॉफी उठाई। यह अभियान साबित करता है कि शुरुआती असफलताएं अंत नहीं होती।
एमएस धोनी की युवा टीम ने टी20 युग की शुरुआत शानदार अंदाज में की। ग्रुप स्टेज में पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला टाई रहा, जिसे भारत ने बोल-आउट में जीता, फिर सुपर 8 में न्यूजीलैंड से 10 रन की हार मिली। 190 रनों का पीछा करते हुए टीम 180/9 तक ही पहुंच सकी। इसके बावजूद सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया और फाइनल में पाकिस्तान को हराकर भारत ने पहला टी20 विश्व कप जीता। इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम का सफर दिखाता है कि एक हार यह तय नहीं कर सकती कि सफर कहां खत्म होगा।
घरेलू मैदान पर भारत ने 28 सालों का लंबा इंतजार खत्म करते हुए अपना दूसरा ओडीआई विश्व कप उठाया। लेकिन ग्रुप स्टेज में दक्षिण अफ्रीका से तीन विकेट की हार और इंग्लैंड से टाई हुए मैच ने टीम को चेताया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में भारत ने 296 रन बनाए, जवाब में प्रोटियाज ने 300/7 बनाकर जीत दर्ज की। वहीं इंग्लैंड से मुकाबला 338 रनों पर टाई हुआ। मगर आखिरकार क्वार्टरफाइनल में ऑस्ट्रेलिया, सेमीफाइनल में पाकिस्तान और फाइनल में श्रीलंका को हराकर भारत चैंपियन बना। यह जीत रणनीति, धैर्य और बड़े मौकों पर दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन की मिसाल थी।
रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने इतिहास रच दिया। आठ मैचों में सात जीते, जबकि कनाडा के खिलाफ मैच बारिश के चलते रद्द हो गया था। ग्रुप चरण से लेकर फाइनल तक भारत ने दबदबा बनाए रखा और खिताब अपने नाम किया। यह पहली बार था जब भारत ने किसी विश्व कप में एक भी मैच नहीं गंवाया।
इतिहास साफ संकेत देता है कि विश्व कप का रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता। बड़ी टीमें हार से सीखती हैं, रणनीति सुधारती हैं और वापसी करती हैं।भारतीय प्रशंसक उम्मीद करेंगे कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली ताजा हार भी शायद उसी बड़े सबक की शुरुआत हो।